पत्रिका ने माफिया की तर्ज पर खेल: जिलेभर में बिना लीज व अनुमति कंपनियां कर रही करोड़ों की खनिज चोरी शीर्षक से खबर प्रकाशित कर इस खेल को उजागर किया था।
जिले में चल रहे सागर-कानपुर फोरलेन चौड़ीकरण प्रोजेक्ट की आड़ में चल रहे अवैध उत्खनन के बड़े खेल का पत्रिका ने पर्दाफाश किया है। पत्रिका ने माफिया की तर्ज पर खेल: जिलेभर में बिना लीज व अनुमति कंपनियां कर रही करोड़ों की खनिज चोरी शीर्षक से खबर प्रकाशित कर इस खेल को उजागर किया था। जिसे संज्ञान में लेकर जिला प्रशासन ने प्रकरण दर्ज कर नोटिस जारी किया और अब कड़ी कार्यवाही करते हुए निर्माण कार्य में लगी एमकेसी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड कंपनी पर 98 लाख 40 हजार रुपए का जुर्माना ठोंका है।
प्रशासन को शिकायतें मिल रही थीं कि फोरलेन निर्माण के नाम पर निर्धारित क्षेत्रों से बाहर जाकर शासकीय भूमि पर अवैध खुदाई की जा रही है। इसकी जांच के लिए कलेक्टर ने खनिज विभाग की टीम को मौके पर भेजा था। खनिज निरीक्षक के प्रतिवेदन और पंचनामे के बाद यह स्पष्ट हुआ कि कंपनी ने दो अलग-अलग स्थानों पर बिना किसी वैध अनुमति के भारी मात्रा में मुरूम का अवैध उत्खनन किया है।
नियमों के अनुसार कंपनी को पहले समझौते (प्रशमन) के तहत कम जुर्माने का अवसर दिया गया था। लेकिन एमकेसी इंफ्रास्ट्रक्चर ने न तो निर्धारित समय सीमा में राशि जमा की और न ही संतोषजनक जवाब पेश किया। मध्य प्रदेश खनिज (अवैध खनन, परिवहन तथा भण्डारण का निवारण) नियम, 2022 की धारा 18(6) के तहत, यदि कोई अनावेदक समझौता नहीं करता है, तो जुर्माने की राशि को दोगुना करने का प्रावधान है। इसी आधार पर प्रशासन ने अब कुल शास्ति राशि को डबल कर दिया है।
प्रकरण 1: खसरा नंबर 1207/4 (68.40 लाख का जुर्माना)
शासकीय भूमि खसरा नंबर 1207/4 के अंश भाग पर कंपनी ने अवैध खुदाई की। नाप के दौरान पाया गया कि यहां 95 मीटर लंबाई, 12 मीटर चौड़ाई और 02 मीटर गहराई में लगभग 2280 घनमीटर मुरूम निकाली गई। इस मामले में मूल शास्ति राशि 34.20 लाख रुपए थी, जिसे भुगतान न करने पर बढ़ाकर 68 लाख 40 हजार रुपए कर दिया गया।
प्रकरण 2: खसरा नंबर 140 (33 लाख का जुर्माना)
इस कार्यवाही में पाया गया कि खसरा नंबर 140 से लगभग 1100 घनमीटर मुरूम का अवैध उत्खनन हुआ। यहां 16.50 लाख रुपए का मूल जुर्माना तय था, जो अब कंपनी की लापरवाही के कारण दोगुना होकर 33 लाख रुपए हो गया है।
कलेक्टर के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इस जुर्माने में केवल रॉयल्टी की राशि ही शामिल नहीं है, बल्कि रॉयल्टी का 15 गुना दंड और उसके बराबर ही पर्यावरण क्षतिपूर्ति की राशि भी जोड़ी गई है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि विकास कार्यों के नाम पर पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के साथ खिलवाड़ करने वाली कंपनियों को कड़ा सबक मिल सके।
कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने साफ कर दिया है कि जिले में कोई भी निर्माण कंपनी हो या व्यक्ति, यदि वह सरकारी नियमों के विरुद्ध जाकर प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करेगा, तो उस पर इसी तरह की कठोर कार्यवाही की जाएगी। प्रशासन ने कंपनी को तत्काल प्रभाव से यह राशि जमा करने के निर्देश दिए हैं, अन्यथा अगली वैधानिक कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।