छतरपुर

बेजुबानों के प्रति दया का भाव सिखा रही सार्थक प्रयास समिति, पक्षियों की प्यास बुझाने निःशुल्क बांट रहे मिट्टी के सकोरे

प्यास से गर्मी के दिनों में काल के गाल में समा जाते हैं पक्षी

2 min read
Mar 16, 2026
सकोरे के साथ समाजसेवी

कहते हैं कि किसी भी जीव पर दया करना हमारा सबसे बढ़ा धर्म होता है। हम अगर इंसानियत का पाठ सीख गए तो जीवन की राह आसान हो जाती है। ऐसे में अगर हम बेजुबानों की मदद करें तो सच्चा धर्म यही है। कोई भी धर्म हो वह हमें परोपरार और दया का पाठ ही पढ़ाता है। ऐसे में गर्मी के दिनों में बेजुबान पक्षियों की आवाज बन रही है जीव दया के क्षेत्र में कार्य कर रही संस्था सार्थक प्रयास समिति। संस्था के द्वारा बीते कई वर्षों से मुफ्त सकोरे बनाकर वितरित किए जाते हैं। पक्षियों की प्यास बुझाने के मकसद से संस्था लगातार सकोरे ऑर्डर देकर बनवाती है।

पक्षी फल समझकर सकोरे तक पहुंच जाते

समिति के अध्यक्ष प्रकाश चंद्र जैन ने बताया कि वह चार छेद वाले सकोरा जनवरी में आर्डर देकर बनवाते हैं, जो बाजार में बिक्रय करने के लिए उपलब्ध नहीं होते हैं, वे निःशुल्क उपलब्ध कराते हैं। सकोरे पर पीला कलर भी करवाते हैं जिससे वह आकर्षक लगने के साथ-साथ पक्षी भी फल समझकर सकोरे तक पहुंच जाते हैं।

डेकोरेट करके बांटते हैं सकोरे

सकोरों पर तार बांधकर कंप्लीट करके यह सकोरे स्कूलों में जा जाकर बच्चों एवं स्टॉफ को निःशुल्क घर ले जाने के लिए दिए जा रहे हैं। जिससे बच्चों में भी परमार्थ कार्य करने की भावना जागृत हो। सकोरे प्रकाश जैन खुद जाकर उस जगह पेड़ों पर लगाते हैं जहां आसपास के मकान मालिक या दुकान वाले पानी भरने एवं समय-समय पर साफ सफाई करने की जिम्मेवारी लेते हैं।


जीव दया का संदेश


प्रकाश कहते हैं कि जब गर्मी बहुत तेज पड़ती है उस समय पक्षियों को अपना जीवन बचाने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ता है एवं पानी के बिना पक्षी असमय ही काल के गाल समा जाते हैं, अधिक गर्मी बढ़ने पर कई बार आपने देखा होगा पेड़ों के नीचे पक्षी मृत अवस्था में पड़े मिलते हैं। अतः पक्षियों को दाना एवं पानी उपलब्ध कराना सभी मानव जाति के लोगों का धर्म एवं कर्तव्य है। प्रकाश जैन का कहना है कि जिस किसी को सकोरे चाहिए वे बस स्टैंड के पास महेश टॉकीज गली में आकर मुफ्त ले सकता है।

Published on:
16 Mar 2026 10:36 am
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