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जिले में जमीन की खरीद-बिक्री और रिकॉर्ड को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने जिस वेब जीआईएस पोर्टल को हथियार बनाया था, आज वही पोर्टल किसानों और भू-स्वामियों के लिए मुसीबत का सबब बन गया है। अधिकारियों द्वारा टारगेट पूरा करने की जल्दबाजी में पोर्टल पर गलत नक्शे और त्रुटिपूर्ण खसरे अपलोड कर दिए गए हैं। आलम यह है कि पोर्टल के भरोसे संपत्ति की जानकारी लेना अब जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए विशेषज्ञों ने मूल रिकॉर्ड की जांच को अनिवार्य बताया है।
राजस्व विभाग की इस बड़ी लापरवाही का खुलासा तब हुआ जब जिले के करीब 90 गांवों के डिजिटल नक्शों में भारी विसंगतियां पाई गईं। गौरिहार, घुवारा, चंदला, छतरपुर, नौगांव, बकस्वाहा, बड़ामलहरा और बिजावर सहित कई तहसीलों के किसान परेशान हैं। हैरानी की बात यह है कि घुवारा तहसील के देवपुर और बकस्वाहा के पाली गांव में दूसरे ही गांवों के नक्शे अपलोड कर दिए गए हैं। वहीं, श्यामरा गांव का नक्शा अब तक डिजिटाइज्ड नहीं हो सका है और गठेवरा का नक्शा पूरी तरह त्रुटिपूर्ण है। छतरपुर नगर और ग्रामीण क्षेत्र में ही 19 नक्शे पूरी तरह गड़बड़ स्थिति में हैं।
वेब जीआईएस में खसरा नंबरों को नक्शे में दर्ज करने में जमकर लापरवाही बरती गई है। कई ऐसी जमीनें हैं जिनके खसरा बटांक की तरमीम या वैधानिक बंटवारा तक नहीं हुआ, लेकिन कागजों में टारगेट पूरा दिखाने के लिए उन्हें पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज कर दिया गया है। इससे जमीन की वास्तविक स्थिति और पोर्टल के रिकॉर्ड में जमीन-आसमान का अंतर आ गया है।
इस तकनीकी धोखाधड़ी का खामियाजा सीधे तौर पर किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
सीमांकन विवाद- डिजिटल नक्शा गलत होने के कारण पड़ोसी किसानों के बीच खेतों की मेड़ को लेकर विवाद बढ़ रहे हैं।
सरकारी योजनाओं में बाधा- पीएम किसान सम्मान निधि, ई-केवाईसी और खसरा-खतौनी सत्यापन में समस्याएं आ रही हैं।
बैंक ऋण और केसीसी- बैंक डिजिटल नक्शे के आधार पर ही सत्यापन करते हैं, डेटा गलत होने से ऋण की फाइलें अटक रही हैं।
मुआवजे का संकट- सडक़ या नहर निर्माण के दौरान गलत नक्शों के कारण किसानों को कम मुआवजा मिलने की आशंका बनी हुई है।
ऑनलाइन रिकॉर्ड फेल होने के कारण पटवारियों को अब पुराने पारंपरिक रिकॉर्ड का सहारा लेना पड़ रहा है। सीमांकन के समय पोर्टल काम नहीं करता, जिसके चलते पटवारी मौके पर पहुंचकर हाथ से नक्शा बनाकर किसानों को दे रहे हैं ताकि उनके जरूरी काम न रुकें।
इस संबंध में छतरपुर कलेक्टर पार्थ जैसवाल का कहना है कि नक्शों में संशोधन के लिए प्रस्ताव आयुक्त भू-अभिलेख को भेजे गए हैं। जिन गांवों के नक्शे अधूरे हैं, उन्हें जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश संबंधित तहसीलदारों को दिए गए हैं।
Published on:
16 Mar 2026 10:28 am
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