छतरपुर

मुआवजे की जंग: केन-बेतवा लिंक परियोजना के ढोड़न बांध स्थल पर बाहरी प्रदर्शनकारियों का डेरा, छतरपुर के असली प्रभावितों से ज्यादा पन्ना के ग्रामीणों ने घेरा मैदान

मौके पर मौजूद प्रदर्शनकारियों में केन-बेतवा परियोजना के वास्तविक प्रभावितों से कहीं ज्यादा संख्या पन्ना जिले के उन लोगों की है, जो पहले ही समूह जल प्रदाय योजनाओं के अंतर्गत मझगांय एवं रूंझ बांध परियोजनाओं से प्रभावित हो चुके हैं।

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Apr 12, 2026
प्रदर्शनकारी

देश की पहली महत्वाकांक्षी केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना अब मुआवजे के पेचीदा विवाद में उलझती नजर आ रही है। परियोजना के मुख्य बांध ढोड़न के निर्माण स्थल पर चल रहे विरोध प्रदर्शन में एक नया और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। मौके पर मौजूद प्रदर्शनकारियों में केन-बेतवा परियोजना के वास्तविक प्रभावितों से कहीं ज्यादा संख्या पन्ना जिले के उन लोगों की है, जो पहले ही समूह जल प्रदाय योजनाओं के अंतर्गत मझगांय एवं रूंझ बांध परियोजनाओं से प्रभावित हो चुके हैं। पन्ना जिले के अजयगढ़ तहसील की इन दोनों परियोजनाओं पर चार साल से काम चल रहा है। मझगांय पेयजल और रूंझ सिंचाई से जुड़ी परियोजना है।

मुआवजे का अंतर बना विवाद की जड़


इस पूरे विवाद के पीछे मुआवजे की राशि में मौजूद बड़ा अंतर है। जानकारी के अनुसार केन-बेतवा लिंक परियोजना के अंतर्गत प्रति परिवार विस्थापन और मुआवजे के रूप में लगभग 12.50 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है। वहीं दूसरी ओर, पन्ना जिले की मझगांय और रूंझ बांध परियोजनाओं के प्रभावितों को केवल 5 लाख रुपए की राशि दी गई थी। इसी सवा सात लाख के अंतर ने पन्ना के प्रभावितों को ढोड़न बांध स्थल पर डेरा जमाने के लिए उकसाया है।

दोबारा मुआवजा पाने की जुगत

सूत्रों का कहना है कि पन्ना जिले के मझगांय और रूंझ बांध से प्रभावित लोग अब केन-बेतवा परियोजना के प्रभावितों के साथ सुर में सुर मिला रहे हैं। इनका मुख्य उद्देश्य यह है कि किसी तरह इन्हें भी केन-बेतवा के बराबर (12.50 लाख) मुआवजा मिल सके या फिर इन्हें इस नई परियोजना का हिस्सा मानकर दोबारा लाभ दिया जाए। यही कारण है कि प्रदर्शन स्थल पर छतरपुर के प्रभावित गांवों से ज्यादा भीड़ पड़ोसी जिले पन्ना के लोगों की नजर आ रही है।

मझगांय और रूंझ के प्रभावितों का शक्ति प्रदर्शन

ढोड़न बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों के स्थानीय लोगों का कहना है कि उनकी जायज मांगों के बीच बाहरी लोगों के आने से मामला और अधिक जटिल हो गया है। पन्ना जिले के प्रभावितों का तर्क है कि उनके साथ न्याय नहीं हुआ और उन्हें बहुत कम राशि में विस्थापित कर दिया गया। अब वे केन-बेतवा परियोजना के बड़े बजट और ऊंचे मुआवजे को देखते हुए प्रशासन पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहे हैं।

प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती

इस स्थिति ने प्रशासन और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। एक तरफ केन-बेतवा परियोजना को समय सीमा में शुरू करने का दबाव है, तो दूसरी तरफ उन लोगों की भीड़ से निपटना है जो तकनीकी रूप से इस परियोजना के दायरे में नहीं आते, लेकिन मुआवजे की आस में डटे हुए हैं। अधिकारी अब प्रदर्शनकारियों के दस्तावेजों और पहचान पत्र की जांच करने की योजना बना रहे हैं ताकि असली और बाहरी प्रभावितों के बीच अंतर स्पष्ट हो सके।

परियोजना पर संकट के बादल

मुआवजे की इस खींचतान और बाहरी जिलों के लोगों की घुसपैठ के कारण ढोड़न बांध का प्रारंभिक कार्य प्रभावित हो रहा है। यदि पन्ना जिले के इन प्रदर्शनकारियों को नहीं समझाया गया या हटाया गया, तो आने वाले दिनों में यह विवाद केन-बेतवा लिंक परियोजना के लिए एक बड़ा गतिरोध बन सकता है।

इनका कहना है

पन्ना जिले के मझगांय और रूंझ परियोजना से प्रभावित लोगों की शिकायतों से पन्ना के स्थानीय प्रशासन को अवगत कराया गया है। पन्ना प्रशासन के साथ निरंतर बात की जा रही है कि अगर मुआवजा वितरण में कुछ विसंगति है, तो उनका फिर से सर्वे कराते हुए निराकरण कराएं। छतरपुर जिले के 14 प्रभावित ग्रामों में से जिनकी शिकायतें मिली थीं, उनके लिए जिला स्तर पर टीम गठित कर सर्वे का काम जारी है। कोई भी पात्र व्यक्ति नहीं छूटेगा। प्रदर्शन कर रहे लोग अफवाहों में न आएं और अपनी शिकायतें विधि अनुसार कलेक्टर या एसडीएम ऑफिस में दें, जिनका समय सीमा में निराकरण किया जाएगा। पन्ना के लोग पन्ना प्रशासन से बात करें और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करें।

पार्थ जैसवाल, कलेक्टर, छतरपुर

Published on:
12 Apr 2026 10:52 am
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