सुबह से ही आसमान से बरसती आग और गर्म हवाओं के थपेड़ों ने आम जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया। हालात यह रहे कि दोपहर होते-होते शहर की मुख्य सड़कें और बाजार पूरी तरह से सूने नजर आए
बुंदेलखंड के छतरपुर जिले में इन दिनों सूर्य देव का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है और पूरा इलाका भीषण गर्मी की प्रचंड चपेट में है। लगातार बढ़ते तापमान के बीच मौसम विभाग ने जिले में तीव्र लू यानी हीटवेव को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। सोमवार को सुबह से ही आसमान से बरसती आग और गर्म हवाओं के थपेड़ों ने आम जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया। हालात यह रहे कि दोपहर होते-होते शहर की मुख्य सड़कें और बाजार पूरी तरह से सूने नजर आए और चारों तरफ कर्फ्यू जैसा सन्नाटा पसर गया। लोग केवल बेहद जरूरी काम होने पर ही पूरी तरह से चेहरा और सिर ढंककर घरों से बाहर निकल रहे हैं।
मौसम केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार को छतरपुर जिले का अधिकतम तापमान रिकॉर्ड 46.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो 47 डिग्री के बेहद करीब पहुंच गया है। वहीं, न्यूनतम तापमान भी 28.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज होने से रातों में भी भारी उमस और बेचैनी बनी हुई है। जिले के प्रमुख कस्बा नौगांव में भी गर्मी ने अपने तेवर दिखाए, जहां अधिकतम तापमान 46.0 डिग्री और न्यूनतम तापमान 27.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। सोमवार को दिन भर 12 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली गर्म लपटों ने लोगों को झुलसा कर रख दिया, जबकि हवा में आर्द्रता का स्तर महज 25 प्रतिशत दर्ज किया गया, जिससे हवा में सूखापन और चुभन ज्यादा महसूस हुई।
इस बीच मौसम केंद्र खजुराहो के प्रभारी आरएस परिहार ने आने वाले दिनों के लिए और भी चिंताजनक संकेत दिए हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले तीन दिनों तक जिले में तीव्र हीटवेव का यह खतरनाक असर लगातार बरकरार रहेगा और इस दौरान तापमान में और भी ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है। मौसम केंद्र ने लोगों को इस जानलेवा गर्मी से बचने के लिए विशेष रूप से सतर्क रहने और दोपहर के समय अनावश्यक रूप से खुले आसमान के नीचे न जाने की सख्त सलाह दी है। लगातार बढ़ती इस तपन के कारण लोगों की रोजमर्रा की दिनचर्या और कामकाजी घंटे भी पूरी तरह प्रभावित हो चुके हैं।
भीषण गर्मी और लू के सीधे प्रहार को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और ने भी नागरिकों के लिए जरूरी सावधानी बरतने की सलाह जारी की है।लगातार बढ़ती तपन का सीधा असर अब लोगों के स्वास्थ्य पर भी दिखने लगा है। जिला अस्पताल सहित निजी क्लीनिकों में उल्टी, दस्त, चक्कर आने और डिहाइड्रेशन के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। जिला अस्पताल के मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. शरद मिश्रा के अनुसार, दोपहर 12 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक की धूप सबसे ज्यादा घातक होती है, इसलिए इस समयावधि में सीधे धूप के संपर्क में आने से पूरी तरह बचें। डॉक्टरों ने कहा है कि शरीर में पानी की कमी न होने दें, इसके लिए पर्याप्त मात्रा में सादा पानी, नींबू पानी, ओआरएस का घोल, नारियल पानी और छाछ का नियमित सेवन करते रहें। इसके साथ ही बाहर निकलते समय हल्के रंग के सूती कपड़े पहनने और सिर, चेहरे तथा कानों को सूती कपड़े या गमछे से अच्छी तरह ढंककर रखने की सलाह दी गई है, ताकि मौसमी बीमारियों और सनस्ट्रोक के खतरे से बचा जा सके।
अस्पतालों के हालात: इस भीषण और खतरनाक गर्मी के कारण जिला अस्पताल में लू से पीड़ित मरीजों की संख्या में बेतहाशा इजाफा हुआ है। रोजाना 30 से 35 मरीज आ रहे हैं।
बच्चों और बुजुर्गों पर असर: यह गर्मी बच्चों और बुजुर्गों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हो रही है, इसलिए उनका विशेष ख्याल रखने की जरूरत है।
हीट स्ट्रोक के मुख्य लक्षण: शरीर में तेज बुखार, सिरदर्द, चक्कर आना, वोमिटिंग (उल्टी), बेहोशी, हार्ट बीट तेज होना, त्वचा का लाल या गर्म होना, पसीना आना बंद हो जाना, भ्रम होना, अस्पष्ट बोलना या बेहोशी की हालत होना इसके प्रमुख लक्षण हैं।
खान-पान में सावधानी: गर्मी के दिनों में भारी खाना खाने से बचना चाहिए, क्योंकि भारी भोजन को पचाने में शरीर की ज्यादा ऊर्जा लगती है जिससे थकान महसूस होती है। इस मौसम में हल्का और पौष्टिक भोजन ही करना चाहिए।
शारीरिक गतिविधियों पर रोक: गर्मी के दौरान बहुत ज्यादा व्यायाम या भारी शारीरिक काम करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे शरीर का तापमान बढ़ने से हीट स्ट्रोक का खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है।
प्राथमिक उपचार: यदि किसी को हीट स्ट्रोक होता है, तो सबसे पहले उसके शरीर को ठंडा करने का प्रयास करना चाहिए। व्यक्ति को तुरंत ठंडे पानी से नहलाएं या पानी को ठंडा रखने के लिए बर्फ के टुकड़ों का इस्तेमाल करें। साथ ही शरीर के विभिन्न हिस्सों जैसे गर्दन, बगल, कमर और जांघ पर ठंडे कपड़े या बर्फ के पैक लगाएं।
डॉक्टरी सलाह: हीट स्ट्रोक एक बेहद गंभीर स्थिति है जिससे शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंच सकता है और जान भी जा सकती है। इसलिए प्राथमिक उपचार के बाद भी अगर व्यक्ति का तापमान कम न हो या हालत बिगड़े, तो तुरंत डॉक्टर को बुलाना चाहिए या अस्पताल ले जाना चाहिए।