छतरपुर

शहर के मुख्य मार्ग जवाहर रोड से नो-एंट्री हटने से शहर में बढ़ी मुश्किलें, जाम और दुर्घटना की आशंका

ग्वालियर-रीवा हाइवे पर बायपास निर्माण हो चुका है, जिससे पन्ना रोड से भारी वाहनों का शहर के अंदर प्रवेश दिन में बंद हो गया है, लेकिन कानपुर-सागर हाइवे पर बायपास न होने के कारण बड़े वाहन शहर के मुख्य मार्ग जवाहर रोड से होकर गुजर रहे हैं।

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Sep 20, 2025
जवाहर रोड पर ट्रैफिक जाम का दृश्य

शहर से गुजरने वाले नेशनल हाइवे पर लगातार बढ़ते ट्रैफिक और भारी वाहनों की वजह से शहरवासियों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। छतरपुर से दो राष्ट्रीय राजमार्ग ग्वालियर-रीवा नेशनल हाइवे और कानपुर-सागर नेशनल हाइवे निकलते हैं, जिनसे रोजाना 20 हजार वाहनों का आवागमन होता है। ग्वालियर-रीवा हाइवे पर बायपास निर्माण हो चुका है, जिससे पन्ना रोड से भारी वाहनों का शहर के अंदर प्रवेश दिन में बंद हो गया है, लेकिन कानपुर-सागर हाइवे पर बायपास न होने के कारण बड़े वाहन शहर के मुख्य मार्ग जवाहर रोड से होकर गुजर रहे हैं। यही कारण है कि जाम और दुर्घटनाओं की समस्या और गंभीर हो गई है।

2019 में बनाया था नो एंट्री का सिस्टम

अप्रेल 2019 में बस स्टैंड के पास हुई दर्दनाक सडक़ दुर्घटना में नातिन और उसके दादा की मौत के बाद तात्कालीन कलेक्टर मोहित बुंदस ने नो-एंट्री व्यवस्था लागू की थी। नो-एंट्री आदेश के तहत सुबह 6.30 बजे से दोपहर 2.30 बजे तक और शाम 5.30 बजे से रात 10 बजे तक शहर में भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित किया गया था। इस दौरान बड़े वाहनों की निकासी दिन के समय 2.30 बजे से 5.30 बजे तक अल्टरनेट मार्गों से की जाती थी। नो-एंट्री लागू होने से शहरवासियों को जाम और दुर्घटना से राहत मिली थी। लेकिन नवंबर के पहले सप्ताह में यह व्यवस्था अचानक खत्म कर दी गई। इसके बाद दो साल पहले तात्कालीन कलेक्टर संदीप जीआर ने भी शहर में इसी समय पर नो एंट्री का आदेश जारी किया था। लेकिन अब शहर की मुख्य सडक़ों पर 24 घंटे भारी वाहनों का आवागमन होने लगा और ट्रैफिक जाम, दुर्घटना की आशंका फिर से बढ़ गई।

इस माह दो ट्रक खंभो से टकराए

सिंतबर माह में शहर के सागर रोड पर दो अलग अलग घटनाओं में ट्रक बिजली खंभे और ट्रांसफॉर्मर में घुस गए। गनीमत रही की दोनों हादसे रात में हुए जिससे कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन ट्रकों के टकराने के बाद आसपास की शांति नगर, लोकनाथपुरम व आसपास की कॉलोनियों में पूरी रात बिजली सप्लाई ठप रही।

एंबुलेंस फंस रही जाम में

जवाहर रोड पर भारी मालवाहकों के आवागमन के चलते जवाहर पेट्रोलपंप के पास अक्सर जाम लगता है। इस जाम में न केवल आम रहागीर फंसकर परेशान हो रहे हैं। बल्कि मरीज को इमरजेंसी में अस्पताल ले जाने वाली एंबुलेंस भी आधे-आधे घंटे तक जाम में फंसी रहती है। इमरजेंसी में एक एक मिनट कीमती होता है, ऐसे में रोज लगने वाला जाम कहीं न कहीं किसी न किसी एंबुलेंस का रास्ता रोक देता है।

पांच कारणों से बड़े वाहनों की आवाजाही बनी परेशानी

1. अभिभावक रहते हैं डरे-सहमे

शहर के महोबा रोड, जवाहर रोड, सागर रोड पर स्कूल और कोचिंग संचालित होते हैं। इन इलाकों से रोजाना भारी मालवाहक ट्रक गुजरते हैं। कई बार बच्चे साइकिल या पैदल ही ट्रकों के बीच फंस जाते हैं और हादसे का शिकार हो जाते हैं। इस कारण अभिभावक तब तक डरे रहते हैं जब तक उनके बच्चे सुरक्षित घर न लौट आएं।

2. सुबह से शाम तक जाम का झाम

सुबह 7 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक शहर की सडक़ों पर स्कूली बच्चे, दफ्तर जाने वाले लोग और बाजार की भीड़ रहती है। इन्हीं सडक़ों से ट्रक, बसें, ऑटो और अन्य वाहन भी गुजरते हैं। इससे जवाहर रोड और एसपी बंगला से बस स्टैंड तक जाम की स्थिति बनी रहती है। कई बार आधे घंटे तक एम्बुलेंस और मरीज भी जाम में फंस जाते हैं।

3. बड़े वाहनों से सडक़ों का बुरा हाल

शहर की सडक़ें हल्के वाहनों के लिए बनी हैं, लेकिन यहां से दिनभर 12, 16 और 18 चक्के वाले ओवरलोड ट्रक गुजरते हैं। इससे सडक़ें टूटकर गड्ढों में बदल जाती हैं। टूटी सडक़ों से बाइक सवार और छोटे वाहन चालक फिसलकर घायल हो जाते हैं। शहरवासियों को हर रोज दुर्घटना का खतरा बना रहता है। सडक़ों की मरम्मत पर बार-बार सरकारी धन खर्च होता है।

4. धूल का गुबार बन रहा बीमारी का कारण

ट्रकों की आवाजाही से उडऩे वाली धूल शहरवासियों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। खांसी, दमा, एलर्जी और आंखों में जलन की समस्या तेजी से बढ़ रही है। जवाहर रोड पर रहने वाले लोग और दुकानदार रोजाना धूल की परत में ढक जाते हैं। धूलभरी हवा बच्चों और बुजुर्गों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हो रही है।

5. स्वास्थ्य पर बढ़ रहा असर

धूल का असर सांस और हृदय संबंधी मरीजों पर गंभीर पड़ रहा है। कई बार लोगों को लगातार खांसी और सांस फूलने की शिकायत होने पर डॉक्टर और अस्पताल के चक्कर काटने पड़ते हैं। दिन में लोग धूल से बचने चश्मा लगाते हैं, लेकिन रात में यह सीधा फेफड़ों तक पहुंच जाती है। आगे चलकर यह गंभीर बीमारियों का कारण बन रही है।

फैक्ट फाइल

रजिस्टर्ड वाहन- 3 लाख

ट्रकों की संख्या- 2500

बसों की संख्या-500

ई-रिक्शा-1300

नेशनल हाइवे पर ट्रैफिक दबाव- 20 हजार वाहन प्रतिदिन

Published on:
20 Sept 2025 10:39 am
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