10.5 प्रतिशत स्नातक युवक और 20.4 प्रतिशत युवतियां काम की तलाश में, स्किल की कमी बन रही बड़ी बाधा
छतरपुर जिले सहित पूरे मध्य प्रदेश में बेरोजगारी की स्थिति एक विरोधाभास पैदा कर रही है। एक ओर जहां प्रदेश की कुल बेरोजगारी दर 3.7 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत 5.2 प्रतिशत से बेहतर नजर आती है, वहीं जिला मुख्यालय और नगरीय क्षेत्रों के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। छतरपुर जैसे तेजी से विकसित होते शहर में भी ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी बेरोजगारी का ग्राफ ऊंचा है। विशेषकर उन महिलाओं के लिए स्थिति अधिक कठिन है, जो शिक्षित होने के बावजूद घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर स्थायी रोजगार की तलाश में हैं।
हालिया पीएलएफएस रिपोर्ट (सावधिक श्रम बल सर्वेक्षण)के जिला स्तरीय विश्लेषण और प्रदेश के रुझानों को देखें, तो गांवों में बेरोजगारी दर मात्र 2.9 प्रतिशत है। इसके विपरीत छतरपुर जैसे शहरी क्षेत्रों में यह उछलकर 6.6 प्रतिशत तक पहुंच जाती है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाला आंकड़ा शहरी महिलाओं का है। छतरपुर सहित प्रदेश के शहरों में काम करने की इच्छुक हर 100 महिलाओं में से 9.2 प्रतिशत को काम नहीं मिल रहा है। गांवों में महिलाओं की कार्य सहभागिता दर 42.2 प्रतिशत है, जो शहरों में घटकर महज 20.2 प्रतिशत रह जाती है।
आंकड़ों का एक कड़वा सच यह भी है कि छतरपुर के कॉलेजों से केवल स्नातक करने वाले युवाओं को नौकरी पाने में सबसे ज्यादा मशक्कत करनी पड़ रही है। यह दर्शाता है कि केवल किताबी शिक्षा पर्याप्त नहीं है; बाजार की मांग के अनुसार कौशल की कमी युवाओं के आड़े आ रही है।
सरकार युवाओं को हुनरमंद बनाने और रोजगार से जोडऩे के लिए कई मोर्चों पर काम कर रही है।
राष्ट्रीय करियर सेवा पोर्टल- नौकरी की तलाश कर रहे छतरपुर के युवा एक ही प्लेटफॉर्म पर अपनी योग्यता के अनुसार रिक्तियां देख सकते हैं।
स्किल इंडिया मिशन- स्थानीय आईटीआई और प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के माध्यम से उद्योगों की जरूरत के हिसाब से ट्रेनिंग दी जा रही है।
फ्यूचर स्किल्स प्राइम- जो युवा तकनीकी क्षेत्र में जाना चाहते हैं, उनके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकों की ट्रेनिंग की सुविधा भी शुरू की गई है।
मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना- जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के माध्यम से खुद का स्टार्टअप शुरू करने के लिए ऋण की सुविधा।
विशेषज्ञ की राय- छतरपुर में पर्यटन (खजुराहो) और कृषि आधारित उद्योगों में अपार संभावनाएं हैं। स्नातक युवाओं को पारंपरिक नौकरियों के बजाय स्किल-बेस्ड ट्रेनिंग और स्वरोजगार की ओर कदम बढ़ाने चाहिए ताकि शहरी बेरोजगारी के आंकड़ों को कम किया जा सके।
फोटो- एआइ फोटो