स्लीपर बसों में लगातार सामने आ रही दुर्घटनाओं और आगजनी की गंभीर घटनाओं के बाद परिवहन विभाग ने यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कड़ा रुख अपनाया है। परिवहन आयुक्त के निर्देश पर अब स्लीपर बसों की एआइएस तकनीकी सुरक्षा मानकों के तहत अनिवार्य जांच कराई जाएगी। जांच नहीं कराने वाली बसों पर […]
स्लीपर बसों में लगातार सामने आ रही दुर्घटनाओं और आगजनी की गंभीर घटनाओं के बाद परिवहन विभाग ने यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कड़ा रुख अपनाया है। परिवहन आयुक्त के निर्देश पर अब स्लीपर बसों की एआइएस तकनीकी सुरक्षा मानकों के तहत अनिवार्य जांच कराई जाएगी। जांच नहीं कराने वाली बसों पर विभागीय कार्रवाई करते हुए उनके परमिट और फिटनेस पर रोक लगाई जाएगी।
इसी क्रम में जिले के एआरटीओ मधु सिंह ने स्लीपर बस ऑपरेटर्स की बैठक आयोजित कर उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए कि तीन दिन के भीतर सभी स्लीपर बसों की तकनीकी जांच कराई जाए। बैठक में मौजूद बस ऑपरेटर्स ने विभागीय निर्देशों का पालन करने और बसों की जांच कराने पर सहमति व्यक्त की। अधिकारियों ने साफ कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही यात्रियों की जान को जोखिम में डाल सकती है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
गौरतलब है कि देशभर में स्लीपर बसों में 20 से अधिक आगजनी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें कई यात्रियों की जान चली गई। इन घटनाओं को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लेते हुए सभी राज्यों से विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। इसके बाद से ही स्लीपर बसों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर परिवहन विभाग द्वारा सख्ती बढ़ा दी गई है।
अधिकारियों के अनुसार एआइएस तकनीकी सुरक्षा मानक के अंतर्गत बस की संरचना, विद्युत प्रणाली और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत जांच की जाती है। विशेष रूप से एआइएस-119 मानक के तहत स्लीपर बसों में फायर अलार्म और फायर डिटेक्शन सिस्टम अनिवार्य किया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में समय रहते चेतावनी मिल सके और बड़े हादसे को रोका जा सके।
परिवहन विभाग ने चेतावनी दी है कि जो स्लीपर बसें निर्धारित समय सीमा में जांच नहीं कराएंगी, उन्हें वाहन पोर्टल पर नॉट टू बी ट्रांजेक्टेड श्रेणी में डाल दिया जाएगा। ब्लैकलिस्ट होने के बाद संबंधित बस ऑपरेटर्स को परमिट, फिटनेस और अन्य परिवहन सेवाओं का लाभ नहीं मिलेगा।
हालांकि विभाग की ओर से बस ऑपरेटर्स को एक माह की अस्थायी राहत दी गई है। इस अवधि में बिना एआइएस-119 जांच के बसों का संचालन किया जा सकेगा, लेकिन प्रत्येक स्लीपर बस में वैध और कार्यशील 10 किलोग्राम क्षमता का अग्निशमन यंत्र रखना अनिवार्य होगा। साथ ही चालक और स्टाफ को अग्निशमन यंत्र के उपयोग की जानकारी होना भी जरूरी बताया गया है। परिवहन विभाग का कहना है कि इन सख्त कदमों का उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित, भरोसेमंद और मानक अनुरूप परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि आगे भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले बस ऑपरेटर्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।