गजलों की रूमानियत से मुशायरे की फिजा में लगे चार चांद
छतरपुर। खामोश लब हैं, झुकीं हैं पलकें, दिलों में उल्फत नई-नई, तकल्लुफ है अभी गुफ्तगू में, अभी मोहब्बत नई-नई, जो खानदारी रहीस हैं वो मिजाज रखते हैं अपना नरम, तुम्हारा लहजा बता रहा रहा है तुम्हारी दौलत नई-नई...। कुछ इसी तरह के शेर-ओ-शायरी के साथ शहर के महल मैदान में आयोजित हो रहा याद-ए-कैफ ऑल इंडिया मुशायरा में तालियों की गडग़ड़हट गूंजती रही। किसी शायर ने संजीदा शायरी की तो किसी ने सियायत के वर्तमान हालात पर तंज कसा। गजलों की रूमानियत से मुशायरे की फिजा में चार चांद लगा दिए। पूरी रात शेर-ओ-सुखन का दौर चला।
बुधवार की रात करीब दस बजे रिबिन काटकर मुशयरे की समां रोशन की गई। भोपाल से आए शायर विजय तिवारी ने नाते पाक पढ़कर मुशायरे का आगाज किया। इसके बाद उन्होंने अपनी शायरी में कहा इसलिए तो हम जमाने को बहुत दिवाने लगे, किसी ने पूछा नहीं और हम बताने लगे। वो वेवफ है सुन रखा था हमने भी, मगर हमीं को जानने में जमाने लगे। दमोह के ताबिश नय्यर ने अपने कलाम पढ़े। संचालन कर रहे देश के मशहूर शायर अबरार काशिफ ने अपने कई पसंदीदा शेर सुनाकर जमकर वाह-वाही लूटी। अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है, जरा की बूंदा-बांदी है कोई बरसात थोड़ी है, ऐ रहे इश्क है इसमें कदम ऐसे ही उठते हैं, मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है सुना कर जमकर तालियां बटोरीं। करती है तो करने दे हवाओं को सरारत, मौसम का तकाजा है तू बालों को खुला छोड़, ये शेर भी खासा पसंद किया गया। शायरा निकहत अमरोही ने भीड़ में हरगिज़ नहीं खोने दूंगी, मैं तुझे किसी और को नहीं होने दूंगी, पेश की। इकबाल असर ने सरकारों पर तंज कसते हुए कहा कि हमको हमारे सब्र का खूब सिला दिया, यानि दवा न दी गई दर्द बढ़ा दिया। महशर आफरीदी ने अपने शेर में कहा कि अब इस मकाम पर हाथों के आंवले देखें, पहाड़ काटकर दिया है चट्टान छोड़ दें हम। नईम अख्तर ने जितनी खुदनुमाई कर रहा है, खुद अपनी जगहंसाई कर रहा है, जरा सा जोश क्या दरिया में आया, समंदर की बुराई कर रहा है पेश कर खूब तालियां बटोरीं। उनकी एक और गजल वो मेरे पास आना चाहता है मगर कोई बहाना चाहता है, यूं ही उलझा नहीं है पांव मेरा, कोई मुझको गिराना चाहता है, भी खूब पसंद की गई। देश की प्रख्यात शायरा सबीना आदीब ने घर क्या, दिल के इजहार से रोशन होगा, यानी किरदार तो किरदार से रोशन होगा, रात दिन आप चरागों को जलाते क्यों हो, घर चरागों से नहीं प्यार से रोशन होगा सुना कर खासी वाहवाही लूटी। मुशायरे के सबसे खास शायर रहे कलकीधाम पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम अपनी शायरी और गुफ्तगू से जमकर वाहवाही लूटी। आचार्य प्रमोद कृष्णन ने मोदी सरकार पर इशारा करते हुए कहा कि देश पर छाया अजब बुखार, चोर उचक्के नेता बन गए, झूठा चौकीदार.... सुनाया। उन्होंने कहा कि राम तेरे हैं, राम मेरे भी हैं, राम उनके भी हैं जो नहीं राम के, राम के नाम को यूं न रुसवा कर, आग घर को लगाने से क्या फायदा...। मुशायरा की अध्यक्षता मौलाना अंसार रजा ने की।