छिंदवाड़ा

Famous temple: नगर देवी सिद्धपीठ के नाम से विख्यात है श्री संतोषी माता मंदिर

उस समय यह जगह नगर की सीमा थी।

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Famous temple: नगर देवी सिद्धपीठ के नाम से विख्यात है श्री संतोषी माता मंदिर

छिंदवाड़ा. चार फाटक के पास स्थित श्री संतोषी माता मंदिर नगर देवी सिद्धपीठ के नाम से विख्यात हैं। बताया जाता है कि इस मंदिर का इतिहास लगभग दो सौ पूराना है। मंदिर परिसर में पिपल के पेड़ के नीचे खेड़ापति माता विराजमान है। उस समय यह जगह नगर की सीमा थी। पहले लोग माता के दर्शन करते थे और इसके बाद ही नगर में प्रवेश करते थे। मंदिर से जुड़े अंशुल शुक्ला बताते हैं कि मंदिर की ख्याती दूर-दूर तक फैली हुई है। क्षेत्रवासी कोई भी शुभ कार्य माता के दर्शन करने के बाद भी करते हैं। उन्होंने बताया एक समय ऐसा था जब पूरे शहर में सूखा पड़ गया था, लेकिन मंदिर में स्थित कुएं में पानी था। इसी कुएं से पूरे शहर के लोगों की प्यास बुझी। जो लोग सच्चे मन से माता के दर पर आते हैं उनकी सभी मनोकामना पूरी होती है। यही वजह है कि इस मंदिर की ख्याती दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। मंदिर की भव्यता भी लोगों को आकर्षित करती है। मंदिर भवन का बाहरी निर्माण हमें दक्षिण भारत की तरफ के मंदिरों की याद दिलाता है। बताया जाता है कि इसका निर्माण कार्य वर्ष 1960 के आसपास प्रारंभ हुआ था। तब स्वरूप छोटा था। फिर धीरे-धीरे स्वरूप बदलता गया। उस समय अपने शहर की सीमा काफी छोटी थी। श्री संतोषी माता मंदिर परिसर में 1960 के पूर्व से ही पीपल के वृक्ष के नीचे श्री खेड़ापति माई विराजमान हैं। उस समय हर व्यक्ति नगर में प्रवेश से पहले खेड़ापति माई की पूजा कर उनका आशीर्वाद लकर ही आगे बढ़ता था। इसके बाद पंडित स्व. रामदुलारे शुक्ला मन्ना महाराज एवं पंडित स्व. सुखदयाल शुक्ला परिवार द्वारा नगर पालिका को जमीन श्री संतोषी माता मंदिर बनाने हेतु समर्पित की गई। पूर्व में मंदिर के गर्भगृह में कांच का सुंदर कार्य था, देवी जी की मूर्ति के चारो तरफ कांच से सूंदर डिजाइन बनी हुई थी। समिति सदस्यों ने मंदिर को और भव्य एवं आकर्षक बनाने के लिए दक्षिण शैली में मंदिर को बनवाया। इसके लिए दक्षिण भारत से दक्ष कारीगर बुलाए गए। बैतूल में बालाजी मंदिर का निर्माण चल रहा था। समिति के सदस्य वहां घूमने गए हुए थे। बालाजी मंदिर को देखकर सदस्यों ने श्री संतोषी माता मंदिर का निर्माण भी कुछ उसी तरह करने का निर्णय लिया।

यज्ञ के बाद स्वर्ण कलश हुआ स्थापित
मंदिर निर्माण के बाद श्रद्धालुओं के सहयोग से समिति द्वारा यज्ञ करवाकर मंदिर के ऊपर स्वर्ण कलश स्थापित किया गया। मंदिर का गुंबज कलश सहित 51 फीट का है। इस मंदिर में मुख्य देवी श्री दुर्गा माता, अन्नपूर्णा माता, शीतला माता, संतोषी माता, गणेश जी, हनुमान जी, कालभैरव, शिव जी आदि विराजमान है। आज भी लोग अपनी मन्नत पूरी करने देवी के दरबार में आते हैं। मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित दयाराम शास्त्री हैं। मंदिर के सामने ब्रिज के नीचे एक सुंदर उद्यान बनाया गया है। नवरात्रि के अवसर पर मंदिर में भक्तों का तांता लगता है।

Published on:
11 Oct 2021 05:03 pm
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