साल भर हर्रई और बिछुआ में सर्वाधिक 8-8 बाल विवाह रुकवाए है। अन्य विकासखण्डों को मिलाकर यह संख्या 32 है। इस बार भी प्रशासन ने बाल विवाह रोकने जिला और ब्लॉक स्तरीय समितियों का गठन किया है।
जिले के आदिवासी अंचलों में 18 वर्ष से कम उम्र की बेटियों की शादी हो रही है। जहां प्रशासन को सूचना मिल रही है, वहां उनके बाल विवाह रोके जा रहे हैं।महिला बाल विकास विभाग का दावा है कि साल भर हर्रई और बिछुआ में सर्वाधिक 8-8 बाल विवाह रुकवाए है। अन्य विकासखण्डों को मिलाकर यह संख्या 32 है। इस बार भी प्रशासन ने बाल विवाह रोकने जिला और ब्लॉक स्तरीय समितियों का गठन किया है।
जिले की जनसंख्या 23.74 लाख है। इनमें 37 फीसदी आदिवासी परिवार रहते हैं। पांच फीसदी क्रीमीलेयर परिवार को छोडकऱ शेष मजदूरी और खेत पर निर्भर है। इन परिवारों में यह कुप्रथा है कि 15-16 वर्ष में ही बालिका का विवाह कर दिया जाता है। जबकि सरकार के बाल विवाह निरोधक एक्ट में अधिकतम आयु 18 वर्ष है। इस स्थिति में बालिकाओं का विवाह करने पर उन्हें शारीरिक और मानसिक स्तर की समस्याएं होती है। इसके बावजूद भी लोग समझने को राजी नहीं है। आम तौर पर उन्हें अपनी बालिकाओं के कच्ची उम्र में दिग्भ्रमित होने, कहीं चली जाने या फिर घर छोडऩे का भय सताता है। इस चक्कर में शादियों को कम उम्र में करने की परंपरा चली जा रही है।
कम उम्र में बाल विवाह की जानकारी होने से साल 2025 में 32 बाल विवाह रोके गए हैं। इनमें हर्रई में 8, बिछुआ 8, जुन्नारदेव 2, दमुआ 2, पांढुर्ना 2, छिंंदवाड़ा ग्रामीण 2, तामिया 2, अमरवाड़ा में 2 और मोहखेड़ 1 एवं सौंसर में 3 रोके गए हैं।
बाल विवाह रोकने महिला बाल विकास, पुलिस और राजस्व विभाग की टीम काम कर रही है। परिवार जनों को समझाइश दी जा रही है।
स्वयंसेवी श्यामल राव का कहना है कि ग्रामीणजन झगड़े के भय से बाल विवाह होने की जानकारी नहीं देते हैं। जबकि गांव के हर व्यक्ति को इसके बारे में पता होता है। अभी प्रशासन के पास सूचनाएं पहुंचने पर कार्रवाई हो रही है। राव के अनुसार यह गंभीर सामाजिक समस्या है। जब तक इस बारे में लोग जागरुक नहीं होंगे, तब तक प्रशासन को अभियान चलाना ही पड़ेगा।
हर्रई विकासखण्ड में निवासरत आदिवासी परिवारों में कम उम्र में विवाह करने की परम्परा है। प्रशासन को जहां से खबर मिल रही है, वहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ रोकने की कोशिश की जा रही है। एक साल में 8 विवाह रोकना इसका प्रमाण है।
-रत्नेश वैद्य, परियोजना अधिकारी, महिला बाल विकास विभाग हर्रई।
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वर्ष बाल विवाह
2017 24
2018 39
2019 19
2020 07
2021 25
2022 17
2023 12
2024 22
2025 32
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