छिंदवाड़ा

नहीं मिल सकी जमीन, निजी लॉन और होटलों में शादी की बुकिंग मजबूरी

सबसे ज्यादा समस्या गरीब परिवारों की आती है, जिन्हें निजी स्तर पर महंगे किराए का भवन या लॉन लेना पड़ता है

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नगर निगम परिषद को सत्तारूढ़ हुए तीन साल बीतने पर आ गए, लेकिन अभी तक सरकारी मैरिज लॉन-हॉल के पहले संकल्प पर काम नहीं हो पाया है। निगम के पास जमीन का चिह्नांकन और आवंटन न होने की समस्या है, तो जनप्रतिनिधियों ने भी इसके निर्माण में रुचि नहीं दिखाई है।


साल 2024 की तुलसी ग्यारस से शादी-विवाह की शहनाइयां की गूंज हो रही है। तब से अब तक छह माह में 50 से ज्यादा विवाह मुहूर्त में शादियां हो चुकी हैं। आगे जुलाई तक देवउठनी ग्यारस तक और भी शादियां होंगी। सबसे ज्यादा समस्या गरीब परिवारों की आती है, जिन्हें निजी स्तर पर महंगे किराए का भवन या लॉन लेना पड़ता है। निगम के मैरिज लॉन बन जाते तो इस समस्या का समाधान हो जाता। दुर्भाग्य से इस समस्या पर अब तक ध्यान नहीं दिया गया है।

मुहूर्त में बारातघर मिलना मुश्किल

एक मुहूर्त में शहर में औसतन 100 शादियां होती हैं। इस दौरान मैरिज लॉन और होटल मिलना मुश्किल हो जाते हैं। फिर 50 हजार से लेकर 1.50 लाख रुपए का किराया गरीब और निम्न मध्यम वर्ग के लिए वहन करना मुश्किल हो जाता है। इस बारे में नेताओं की रुचि भी दिखाई नहीं दे रही है।

सत्ता में आते ही मैरिज लॉन का संकल्प

साल 2022 में नगर निगम में सत्तारूढ़ कांग्रेस परिषद की एमआईसी ने निगम मैरिज लॉन के निर्माण का संकल्प पारित किया था। निगम के पास जमीन न होने से इसे तुरंत पूरा नहीं किया जा सका। निगम प्रशासन ने इस पर कलेक्टर को पत्र लिखा। उसके बाद भी जमीन आवंटन नहीं हो पाया।

एक शादी में न्यूनतम तीन लाख का खर्च

महंगाई के जमाने में जब खाद्य पदार्थ समेत अन्य सेवाओं में मूल्य वृद्धि हुई है, उससे शादी का न्यूनतम खर्च तीन लाख रुपए पहुंच गया है। इसमें लॉन का किराया, भोजन और डेकोरेशन की राशि शामिल है। ये तो गरीब और निम्न मध्यम वर्ग की शादी का आकलन है। कहा जा रहा है कि यदि निगम के मैरिज लॉन बन जाएं और रियायती दर पर मिल जाएं, तो कम से कम लॉन किराया के बजट को कम किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि शहर के 48 वार्डों में शादी-ब्याह करने सामाजिक भवन, लॉन, होटल, सामुदायिक भवन समेत 150 स्थल हैं। इनमें हर विवाह मुहूर्त में शादी हो रही है। कुछ विवाह स्थल पर भोजन व डेकोरेशन समेत अन्य सुविधाएं हैं, तो कुछ में विवाह-डेकोरेशन का इंतजाम करना पड़ता है।

Published on:
16 Apr 2025 10:56 am
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