छिंदवाड़ा

लगातार निकल रहे जहरीले सांप, इस वर्ष बढ़ गई घटनाएं

निकल रहे कोबरा व करेत प्रजाति के जहरीले सांप, सूचना पर पहुंच रहे सर्पमित्र

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छिंदवाड़ा. बारिश के साथ ही सर्पदंश की घटनाओं में लगातार वृद्धि हो जाती है। इस वर्ष सर्पदंश के प्रकरण अधिक सामने आ रहे हैं तथा कई मामलों में समय पर उपचार नहीं मिलने की मृत्यु हो रही है। सर्पदंश के उपचार के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास पर्याप्त मात्रा में एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध है, लेकिन लेटलतीफी मौत का मुख्य कारण बनता है। लगातार सर्पदंश की घटनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में सामने आ रही है, बारिश के दौरान सबसे ज्यादा कोबरा व करैत प्रजाति के जहरीले सांप लोगों के घरों से निकल रहे है। सूचना पर सर्पमित्र भी लोगों के घरों में पहुंचकर सांप का रेस्क्यू कर उन्हें वापस जंगल में छोड़ते है।

  • सर्प दंश के बाद लेटलतीफी में जाती है जान
  • सर्पदंश की घटना के बाद लोग लापरवाही करते हुए उपचार में लेटलतीफी करते है। घटना के बाद सांप के रंग एवं आकार को याद रखने की कोशिश करें। पीडि़त व्यक्ति का सिर ऊंचा रखकर लिटाएं। घाव को साफ पानी एवं साबुन से धो लें। घाव से खून का रिसाव होने दे, घाव पर ढीली व साफ पट्टी रखें। पीडि़त व्यक्ति को जितनी जल्दी हो सके नजदीकी स्वास्थ्य संस्था में ले जाकर उपचार करवाएं।
  • झाडफ़ूक में पड़ जाते है लोग
  • सर्पदंश की घटना के बाद लोग झाडफ़ूक के चक्कर में बाबा, ओझा के पास पहुंचते है। इसके साथ ही लोग सर्पदंश के स्थान पर चीरा लगाकर घाव कर देते है जिससे सेफ्टिक होने का डर रहता है। पीडि़त व्यक्ति की हालत बिगडऩे का इंतजार ना करें, तुरंत नजदीकी अस्पताल लेकर जाएं। सर्पदंश के स्थान को बिल्कुल नहीं हिलाएं मरीज को स्थिर अवस्था में रखें।
  • जिला अस्पताल के भरोसे उपचार व्यवस्था
  • जिला अस्पताल के साथ जिले भर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्नेक एंटी वेनम की उपलब्धता की बात स्वास्थ्य विभाग करता है। जिला अस्पताल के स्टोर में स्नेक एंटी वेनम की उपलब्धता है लेकिन स्वास्थ्य विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त स्टॉक की उपलब्धता नहीं कर पाता है। सर्पदंश का शिकार होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों से मरीज जिला अस्पताल पहुंचते है।
  • इनका कहना है।
  • बारिश के कारण सांप निकलने की घटना ज्यादा हो रही है, इस दौरान जहरीले प्रजाति के सांप ज्यादा निकल रहे है। सर्पदंश की घटना होने पर उपचार में ज्यादा लेटलतीफी नहीं करनी चाहिए। समय पर उपचार के लिए मरीज को अस्पताल व स्वास्थ्य केंद्र में पहुंचाकर मरीज की जान बचाई जा सकती है।
  • रमेश सोनी, सर्प विशेषज्ञय
Published on:
19 Sept 2024 12:18 pm
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