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वेटलैंड्स और प्रवासी पक्षियों पर बनाई जगमग जलमग्न फिल्म

सतपुड़ा प्रोडक्शन के बैनर तले निर्मित डॉक्यूमेंट्री $िफल्म जगमग-जलमग्न का निर्देशन प्रसिद्ध बर्ड एक्सपर्ट एवं पर्यावरणविद् मनीषा परिहार ने किया है। यह $िफल्म वेटलैंड्स और वहां आने वाले प्रवासी पक्षियों पर केंद्रित एक संवेदनशील और जागरूकता से भरी प्रस्तुति है।

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Keoladeo Ghana National Park Many rare birds are missing amidst colorful birds chirping experts worried

भरतपुर केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान स्थित प्रवासी पक्षी रेड क्रेस्टेड पोचर्ड, गड़वेल, कॉमन कूट, कॉमन पोचर्ड धूप सेंकते हुए। फोटो पत्रिका

सतपुड़ा प्रोडक्शन के बैनर तले निर्मित डॉक्यूमेंट्री $िफल्म जगमग-जलमग्न का निर्देशन प्रसिद्ध बर्ड एक्सपर्ट एवं पर्यावरणविद् मनीषा परिहार ने किया है। यह $िफल्म वेटलैंड्स और वहां आने वाले प्रवासी पक्षियों पर केंद्रित एक संवेदनशील और जागरूकता से भरी प्रस्तुति है।
$िफल्म का पहली बार प्रदर्शन सतपुड़ा $िफल्म $फेस्टिवल में किया गया, जहां इसे दर्शकों और पर्यावरण प्रेमियों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। जगमग-जलमग्न की शूटिंग जमुनिया और बम्होड़ी पंडा क्षेत्रों में की गई है। $िफल्म इन जलमग्न एवं आद्र्रभूमि क्षेत्रों की प्राकृतिक सुंदरता, जैव विविधता तथा वहां प्रवास करने वाले पक्षियों के जीवन को बेहद संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करती है। निर्देशक मनीषा परिहार का मानना है कि यदि समय रहते वेटलैंड्स और जल स्रोतों की रक्षा नहीं की गई, तो न केवल प्रवासी पक्षियों का भविष्य खतरे में पड़ेगा, बल्कि स्थानीय लोगों की आजीविका और पर्यावरणीय संतुलन भी प्रभावित होगा। जगमग-जलमग्न एक ऐसी $िफल्म है जो केवल कहानी नहीं कहती, बल्कि संरक्षण, सह-अस्तित्व और सतत विकास का संदेश भी देती है।

कुएं में मोटर निकालने उतरे मजदूर की मौत

पांढुर्ना. ग्राम लांघा में मोटर निकालने कच्चे कुएं में उतरे मजदूर की मौत हो गयी। पुलिस ने शव को कुएं से बाहर निकालकर पंचनामा कार्रवाई कर मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
एएसआई शिवकरण पांडे ने बताया कि मृतक दीपक पिता गुलाब सिरसाम 38 वर्ष निवासी लांघा रमेश सरकार और पुरषोत्तम देशभ्रतार के खेत में कुएं में मोटर निकालने उतरा था। 15 सौ रुपए में मजदूरी तय हुई थी। कुएं से मोटर निकालने के दौरान पांव फिसलने से वनीचे गिर गया। जिससे कुएं के अंदर ही उसकी मौत हो गयी। कुआं कच्चा और काफी पुराना होने से असुरक्षित था। तत्काल बचाव के साधन भी उपलब्ध नहीं थे।