चित्तौड़गढ़

Chittorgarh: श्मशान भी नहीं सुरक्षित! PPE किट पहनकर की अंत्येष्टि, नदी में कूदे 11 लोग घायल

Chittorgarh Bee Attack: चित्तौड़गढ़ में पारसोली क्षेत्र के श्मशान घाट पर शुक्रवार सुबह मधुमक्खियों के हमले ने एक बार फिर दहशत फैला दी। हालात इतने भयावह हुए कि परिजनों को अपने प्रियजन का अंतिम संस्कार करने के लिए पीपीई किट और हेलमेट का सहारा लेना पड़ा।
2 min read
पीपीई किट पहनकर अंत्येष्टि करते लोग, पत्रिका फोटो
पीपीई किट पहनकर अंत्येष्टि करते लोग, पत्रिका फोटो

Chittorgarh Bee Attack: चित्तौड़गढ़ में पारसोली क्षेत्र के श्मशान घाट पर मधुमक्खियों के हमले ने एक बार फिर दहशत फैला दी। हालात इतने भयावह हुए कि परिजनों को अपने प्रियजन का अंतिम संस्कार करने के लिए पीपीई किट और हेलमेट का सहारा लेना पड़ा। हमले में 11 ग्रामीण घायल हो गए हैं, जिन्हें उपचार के लिए पारसोली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है।

चिता सजाते ही हमला

जानकारी के अनुसार, पारसोली और सुखपुरा गांव के ग्रामीण दो व्यक्तियों के अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट पहुंचे थे। चिता सजाने के महज 10 मिनट बाद ही पास के पेड़ पर बैठे मधुमक्खियों के झुंड ने अचानक हमला कर दिया। हमले से बचने के लिए वहां भगदड़ मच गई। जान बचाने के लिए कई लोग पास ही बह रही नदी में कूद गए। घायलों में नारायण स्वर्णकार, कालू लाल, कन्हैयालाल, नारायण रेगर, दीपू, मोनू, संपत, सत्यनारायण, मनीष, रतनलाल और खेमलाल शामिल हैं।

प्रशासन की चुप्पी पर ग्रामीणों का आक्रोश

यह पहली बार नहीं है जब पारसोली श्मशान में ऐसा मंजर दिखा हो। इससे पहले भी यहां दो बार मधुमक्खियों का हमला हो चुका है, जिसमें 2 लोगों की जान जा चुकी है और 24 से अधिक लोग घायल हुए थे। कीतियास गांव में भी हवन के दौरान पंडित जमनालाल की मौत मधुमक्खियों के हमले से हुई थी।

बार-बार हो रही इन घटनाओं के बावजूद प्रशासन की ओर से श्मशान परिसर से इन छत्तों को हटाने का कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया है। इस संबंध में आक्रोशित ग्रामीणों का कहना है कि हम अपनों को खोने का दुख मनाएं या अपनी जान बचाएं? प्रशासन को क्या किसी और बड़ी अनहोनी का इंतजार है?

संपादकीय टिप्पणी

पारसोली के श्मशान घाट से आई पीपीई किट और हेलमेट में अंतिम संस्कार की तस्वीरें व्यवस्था के चेहरे पर तमाचा हैं। जहां इंसान अपने प्रियजन को अंतिम विदाई देने जाता है, वहां उसे जान बचाने के लिए नदी में कूदना पड़ रहा है। हैरानी इस बात पर है कि इसी स्थान पर दो मौतें और दर्जनों लोग घायल होने के बावजूद प्रशासन कुंभकर्णी नींद सोया है।
क्या जिम्मेदार अधिकारी किसी और 'शहादत' का इंतज़ार कर रहे हैं? मधुमक्खियों का छत्ता हटाना कोई जटिल रॉकेट साइंस नहीं है, बस प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी है। साहब! मौत का मातम मनाने दीजिए, कम से कम श्मशान को तो सुरक्षित कीजिए।

Updated on:
28 Mar 2026 10:56 am
Published on:
28 Mar 2026 10:56 am