
अचानक बिगड़े मौसम ने आसमान छू रहे लहसुन के भावों को औंधे मुंह गिरा दिया है। लहसुन के दाम में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी से किसानों के चेहरों पर रौनक देखने को मिल रही थी। लेकिन, रविवार को अचानक 120 रुपए प्रतिकिलो तक की कमी ने किसानों की चिन्ता बढ़ा दी है। इसका मुख्य कारण सभी मंडियों में आवक बढऩा बताया जा रहा है। मंडियों में आवक के साथ ही लोगों की मांग भी कम हो गई है। कई किसानों ने लहसून के और भाव बढऩे के इंतजार में अपने पास स्टॉक रखा हुआ था। अचानक मौसम में आए बदलाव के बाद लहसुन के खराब होने के डर से सभी बेचने के लिए मंडी पहुंचे लगे तो अचानक मंडी में आवक बढ़ गई।
कल तक भी महंगा था लहसुन
चित्तौडग़ढ़ जिले में पिछले लगभग 4 महीने से लगातार लहसुन के भाव में तेजी देखने को मिल रही थी। रविवार को अचानक दाम में गिरावट आई है। लहसुन के दाम अचानक 120 रुपए तक टूटे। शनिवार तक भी मंडी में व्यापारियों ने लहसुन 350 रुपए प्रति किलो की दर से होलसेल में बेचा था। बाजार में यह 400 से 450 रुपए प्रतिकिलो तक बेचा जा रहा था। बाहरी राज्यों से लहसुन नहीं आ रहा है। चित्तौडग़ढ़ मंडी में पड़ोसी राज्य एमपी के नीमच और मंदसौर से लहसुन की आवक होती है। वहां भी आवक कम होने के कारण परेशानी बढ़ गई थी। इसका फायदा उठाकर व्यापारियों ने भी लहसुन के दाम बढ़ा दिए। शादियों का सीजन होने के कारण कई लोग मजबूरी में एडवांस लेकर गए, लेकिन घरों में लहसुन की पहुंच कम होने लगी।
रसोई से दूरी बनाने लगा था लहसून
घरों में लगभग सभी सब्जियों में लहसुन उपयोग किया जाता है, लेकिन इस तरह बढ़ते दाम को देखते हुए महिलाओं ने सब्जियों में लहसुन का उपयोग करना कम कर दिया। कुछ महीने पहले इसी तरह टमाटर, प्याज के भाव में तेजी देखने को मिल रही थी। अब जब आवक बढ़ी तो मांग कम होने के कारण व्यापारियों को दाम भी कम करने पड़े। रविवार को लहसुन के थोक भाव 200 से 250 रुपए प्रतिकिलो तक रहे। जबकि बाजार में 300 रुपए प्रति किलो तक की बिक्री हो रही है। हालांकि अभी भी लहसुन आम जनता की पहुंच से बाहर ही है। फिर भी आने वाले दिनों में शादियों के कारण इसकी बिक्री बढ़ सकती है। किसानों के लिए यह फायदेमंद साबित हो सकता है।
स्टॉक होने लगे खराब तो किसान पहुंचे मंडी
थोक व्यापारी किशोर धाकड़ ने बताया कि लहसुन का भाव पिछले 3 माह से बढ़ा हुआ था। इसको देखते हुए कई किसानों ने स्टॉक कर रखा था, लेकिन इन दिनों मौसम तंत्र बिगड़ने के कारण लहसुन खराब होने लगा। इसके चलते किसान भी मंडी में लहसुन बेचने पहुंच रहे हैं, जिससे अचानक आवक बढ़ गई है। इन दिनों गीला लहसुन आ रहा हैं लेकिन पुराना लहसुन महंगा बिक रहा था। आवक होने से रविवार को अचानक से ही उसके दम टूट गए।
शादियों के सीजन व कम आवक से आसमान छूने लगे भाव
जिले में कुछ दिनों से शादियों के सीजन और सब्जियों की कम आवक से सब्जियों के भावों में बढ़ोतरी हुई है। कम आवक से जहां भिंडी आंख दिखाने लगी तो करेला और कड़वा हो गया। थाली में सलाद के रूप में खीरा ककड़ी का स्वाद भी फीका पडऩे लगा है।
भावों में अचानक आए उछाल के पीछे शादियों का सीजन व कम आवक है। व्यापारी नरेश मेनारिया ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से मंडी में सब्जियों की कम आवक होने व मांग अधिक होने से भावों में तेजी आई है।
सब्जी पहले- अब (प्रति किलो)
चित्तौड़गढ़ में सब्जियों के दाम पहले - अब कुछ इस प्रकार है-
खीरा 15- 30
भिंडी 30- 50
करेला 25- 50
मटर 20 -45
शिमला मिर्च 30 -80
अदरक 80 -110
तरोई 30 -50
बैगन 20- 40
मिर्च 30 -50