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Sanwaliya Seth Mandir: सांवलिया सेठ के दरबार में अनोखी भेंट, जयपुर के श्रद्धालु ने अर्पित की 20 लाख की सोने की बांसुरी

Sanwaliya Seth Mandir: चित्तौड़गढ़ के श्री सांवलिया सेठ मंदिर में जयपुर के एक श्रद्धालु परिवार ने 137 ग्राम शुद्ध सोने से बनी करीब 20 लाख रुपए मूल्य की बांसुरी भगवान को भेंट की। मंदिर प्रशासन ने विधि-विधान से भेंट स्वीकार कर रसीद दी और परिवार का सम्मान किया।
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चित्तौड़गढ़

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Arvind Rao

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Updated: 16 Jul 2026, 2:59 PM IST

Chittorgarh Sanwaliya Seth Mandir

सांवलिया सेठ को भेंट की 20 लाख रुपए की बांसुरी (पत्रिका फोटो)

Chittorgarh Sanwaliya Seth Mandir: राजस्थान में चित्तौड़गढ़ जिले के प्रसिद्ध श्री सांवलिया सेठ मंदिर में एक बार फिर आस्था का एक अनूठा रूप देखने को मिला है। जयपुर से आए एक श्रद्धालु परिवार ने भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप सांवलिया सेठ के चरणों में 137 ग्राम शुद्ध सोने से बनी बांसुरी अर्पित की है। बाजार में इस बांसुरी की कीमत लगभग 20 लाख रुपए आंकी जा रही है।

विधि-विधान से सौंपी गई भेंट

श्रद्धालु परिवार ने मंदिर के भेंट कक्ष में पहुंचकर पूरी धार्मिक रीति-रिवाज और विधि-विधान के साथ इस सोने की बांसुरी को मंदिर मंडल को सौंपा। मंदिर प्रशासन ने ससम्मान इस अनोखी भेंट को स्वीकार किया और परिवार को इसकी आधिकारिक रसीद दी।

मंदिर की परंपरा के अनुसार, प्रशासन की ओर से श्रद्धालु परिवार का ऊपरना ओढ़ाकर स्वागत किया गया। साथ ही उन्हें सांवलिया सेठ का विशेष प्रसाद और भगवान की एक सुंदर तस्वीर भी स्मृति चिह्न के रूप में भेंट की गई।

क्यों खास है बांसुरी का दान?

धार्मिक मान्यताओं में भगवान श्रीकृष्ण और उनकी बांसुरी का संबंध अटूट माना गया है। बांसुरी को प्रेम, शांति, भक्ति और जीवन की मधुरता का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि श्रद्धालु ने अपने आराध्य के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा को प्रकट करने के लिए सोने की बांसुरी को सबसे उत्तम माध्यम चुना। मंदिर आने वाले अन्य भक्त भी इस अनोखी भेंट को देखकर आनंदित हैं।

आस्था और समृद्धि का केंद्र

चित्तौड़गढ़ में स्थित श्री सांवलिया सेठ मंदिर देश के सबसे चर्चित धार्मिक स्थलों में से एक है। यहां भगवान कृष्ण के सांवले रूप की पूजा 'सेठ' के रूप में की जाती है। भक्तों का विश्वास है कि यहां मांगी गई हर मुराद पूरी होती है, इसीलिए लोग अपनी मन्नत पूरी होने पर दिल खोलकर चढ़ावा चढ़ाते हैं।

जब भी मंदिर का भंडार यानी दानपात्र खोला जाता है, तो उसमें से करोड़ों रुपए की नकदी, सोना, चांदी, मुकुट, छत्र और कई कीमती आभूषण निकलते हैं। मंदिर प्रशासन इन सभी दान राशियों और आभूषणों का उपयोग मंदिर के विकास कार्यों, धार्मिक आयोजनों और समाज कल्याण के कामों में करता है। जयपुर के परिवार द्वारा चढ़ाई गई यह 20 लाख रुपए की सोने की बांसुरी एक बार फिर यह साबित करती है कि सांवलिया सेठ के दरबार में भक्तों का समर्पण और विश्वास अटूट है।

दूसरे चरण की गिनती में निकले 6.49 करोड़

कृष्णधाम श्री सांवलियाजी मंदिर में भक्तों की अटूट आस्था का खजाना लगातार बढ़ रहा है। मंदिर के दानपात्र (भंडार) से दूसरे चरण की गणना में बुधवार को 6 करोड़ 49 लाख रुपए की राशि और निकली है। इसके साथ ही पहले और दूसरे चरण को मिलाकर अब तक कुल दान राशि का आंकड़ा 16 करोड़ 60 लाख 83 हजार रुपए के पार पहुंच गया है। शेष बची राशि की गणना गुरुवार को तीसरे चरण में की जा रही है।

मंदिर मंडल के अनुसार, कड़ी सुरक्षा के बीच बुधवार को दूसरे दौर की गिनती शुरू हुई। दो दिन की गिनती के बाद भी दानपात्र में बड़ी मात्रा में नकदी शेष है, जिसकी गिनती गुरुवार को की जा रही है। इस दौरान मंदिर मंडल के अध्यक्ष हजारी दास वैष्णव, सदस्य पवन तिवारी, मंदिर प्रभारी भेरू गिरी गोस्वामी, सुरक्षा प्रभारी बिहारीलाल गुर्जर सहित बैंक और मंदिर प्रबंधन के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद हैं।

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