24 अक्टूबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

भरतपुर: मांग का सिंदूर पोंछा, उतारे मंगलसूत्र; शादी के कार्ड पर लिखा ‘स्वर्गीय’, 12 साल बाद जिंदा लौटा पति तो फफक पड़ी पत्नी

भरतपुर के अपना घर आश्रम ने 12 साल से लापता झारखंड निवासी सुनील कुमार को उनके परिवार से मिलाया। परिवार ने उन्हें मृत मानकर अंतिम संस्कार कर दिया था। पत्नी ने सिंदूर-मंगलसूत्र त्याग दिया था। पति के जिंदा लौटते ही पत्नी और बेटा भावुक होकर फफक पड़े।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भरतपुर

•

image

Arvind Rao

•

Updated: 15 Jul 2026, 8:13 PM IST

Bharatpur News

12 साल बाद घर लौटा शख्स (पत्रिका फोटो)

भरतपुर: कभी-कभी जिंदगी ऐसी कहानी लिखती है, जिस पर यकीन करना मुश्किल हो जाता है। झारखंड के गढ़वा निवासी सुनील कुमार के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। परिवार ने उन्हें वर्षों पहले मृत मान लिया था। सात वर्ष पहले धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार उनका अंतिम संस्कार कर दिया। पत्नी की मांग का सिंदूर पोंछ दिया गया, मंगलसूत्र और बिछिया उतरवा दिए गए। इतना ही नहीं, परिवार में एक शादी के निमंत्रण पत्र में उनके नाम के आगे 'स्वर्गीय' भी छप गया। लेकिन नियति ने ऐसा मोड़ लिया कि 12 वर्ष बाद वही सुनील कुमार जीवित मिले और भरतपुर के अपना घर आश्रम ने उन्हें उनके परिवार से मिला दिया।

बता दें कि करीब 12 वर्ष पहले सुनील कुमार अपनी बहन से मिलने बिहार के छपरा गए थे। इसके बाद वह रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए। उसी दौरान क्षेत्र में आई बाढ़ के बाद परिवार को आशंका हुई कि वह नदी में बह गए होंगे। वर्षों तक तलाश के बाद भी जब कोई सुराग नहीं मिला तो परिजनों ने उन्हें मृत मान लिया।

सात वर्ष पहले स्थानीय परंपराओं के अनुसार उनका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया और पत्नी अमरावती देवी ने मजबूरी में विधवा का जीवन स्वीकार कर लिया। कुछ समय पहले अपना घर आश्रम अंबाला की रेस्क्यू टीम को अंबाला रेलवे स्टेशन पर एक गंभीर रूप से बीमार, कुपोषित और टीबी से पीड़ित असहाय व्यक्ति मिला।

प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए भरतपुर मुख्यालय भेजा गया। यहां चिकित्सकीय देखभाल, पौष्टिक भोजन और नियमित उपचार से उसकी तबीयत में सुधार हुआ। होश संभलने पर उसने अपना नाम सुनील कुमार और अपने गांव की जानकारी दी।

इसके बाद आश्रम के पुनर्वास विभाग ने झारखंड पुलिस की मदद से परिवार का पता लगाकर संपर्क स्थापित किया, जब गांव में यह खबर पहुंची कि सुनील जीवित है तो किसी को विश्वास नहीं हुआ, लेकिन सबसे भावुक पल तब आया, जब पत्नी अमरावती देवी और पुत्र नरेश यादव उन्हें लेने भरतपुर पहुंचे, जिस बेटे को छोड़कर सुनील गए थे, वह तब सात-आठ साल का था।

अब जवान हो चुके बेटे को वह पहली नजर में पहचान नहीं सके। कुछ पल तक दोनों एक-दूसरे को देखते रहे और फिर गले लगकर रो पड़े। वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गई।

…और छलकी खुशियां

सबसे मार्मिक दृश्य पत्नी अमरावती देवी का था। वर्षों पहले जिनकी मांग का सिंदूर मिटा दिया गया था, जिन्होंने रंगीन कपड़े पहनना छोड़ दिया था और हर शुभ कार्य से खुद को दूर कर लिया था, वही इस बार मांग में सिंदूर, रंगीन साड़ी और आंखों में खुशी के आंसुओं के साथ अपने जीवित पति को लेने भरतपुर पहुंचीं तो उनकी आंखों में आंसू आ गए और वो फफक-फफककर रो पड़ीं।

उनके लिए यह केवल पति की वापसी नहीं, बल्कि खोया हुआ जीवन, सम्मान और सामाजिक पहचान वापस मिलने जैसा था। अपना घर आश्रम के सचिव नरेंद्र तिवारी ने बताया कि सुनील कुमार का पुनर्मिलन संस्था के सबसे भावनात्मक पुनर्वास अभियानों में से एक है, जिसने 12 वर्षों से बिखरे परिवार को फिर से एक कर दिया। जो अपना घर का मुख्य उद्देश्य भी है।