
दादा-दादी और पोते की मौत (पत्रिका फोटो)
Chittorgarh Lightning Strike Incident: कनेरा (चित्तौड़गढ़): खेत में खड़ी लहलहाती फसल को देखकर बद्रीलाल और चंद्रीबाई की आंखों में सुनहरे भविष्य के सपने थे। छह साल का मासूम पोता विशाल पास ही सो रहा था। किसे पता था कि सोमवार की काली रात इस परिवार के लिए आखिरी रात साबित होगी। तेज गर्जना के साथ बरसी आसमानी आफ्त ने एक ही झटके में तीन पीढ़ियों के रिश्ते को हमेशा-हमेशा के लिए मलबे में तब्दील कर दिया।
बता दें कि लूणखंदा गांव में जब मंगलवार को दादा, दादी और पोते की अर्थियां एक साथ उठीं, तो हर आंख छलक उठी। मोक्षधाम में जब एक ही चिता पर तीनों शवों को मुखाग्नि दी गई, तो उपस्थित जनसैलाब का कलेजा मुंह को आ गया।
परिजनों ने रुंधे गले से बताया कि बद्रीलाल भील अपनी पत्नी और पोते के साथ अनोपपुरा-सुखानंद मार्ग पर स्थित अपने खेत की झोपड़ी में फसल की रखवाली के लिए सो रहे थे। रात करीब 10 बजे अचानक आसमान से मौत बनकर बिजली कड़की।
धमाका इतना जोरदार था कि पास ही सो रहा बेटा और अन्य परिजन सहम गए। वे बदहवास हालत में दौड़कर बद्रीलाल की झोपड़ी में पहुंचे। लेकिन तब तक सब कुछ खत्म हो चुका था। झोपड़ी से धुआं उठ रहा था और तीनों के प्राण पखेरू उड़ चुके थे।
दिल दहला देने वाले इस हादसे के बाद जब चीख-पुकार मची, तो ग्रामीण दौड़ पड़े। तीनों को तुरंत कनेरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मंगलवार सुबह जब पुलिस ने पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंपे, तो पूरे गांव में चूल्हा तक नहीं जला। हर कोई इस बेबस परिवार को ढांढस बंधाने पहुंच रहा था।
इस भीषण वज्रपात से भील परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन व राज्य सरकार से गुहार लगाई है कि पीड़ित परिवार को बिना किसी तकनीकी देरी के तुरंत उचित मुआवजा और आर्थिक संबल प्रदान किया जाए।
Updated on:
08 Jul 2026 07:06 pm
Published on:
08 Jul 2026 07:06 pm
