Biological Park Project:चित्तौड़गढ़ को जल्द ही बायोलॉजिकल पार्क की सौगात मिलेगी। पार्क के लिए वन विभाग को 174 हेक्टेयर भूमि मिल चुकी है। राजस्थान सरकार ने बजट में पार्क निर्माण की घोषणा की थी। इस पर 31 करोड़ रुपए खर्च होंगें।
Biological Park Project: राजस्थान में ऐतिहासिक नगरी चित्तौड़गढ़ के पर्यटन मानचित्र पर जल्द ही एक नया और रोमांचक अध्याय जुड़ने की उम्मीद है। शहर में प्रस्तावित बहुप्रतीक्षित बायोलॉजिकल पार्क के निर्माण की दिशा में वन विभाग ने एक बड़ी बाधा पार कर ली है। पार्क के लिए आवश्यक भूमि के हस्तांतरण की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से पूरी कर ली गई है।
यह बेशकीमती जमीन प्रादेशिक वन मंडल ने उप वन संरक्षक (वन्यजीव) के नाम स्थानांतरित हो चुकी है, जिससे आगामी कार्यों का मार्ग प्रशस्त हो गया है। उल्लेखनीय है कि राजस्थान सरकार ने बजट में बायोलॉजिकल पार्क निर्माण की घोषणा की थी। इस पर करीब 31 करोड़ रुपए खर्च होना प्रस्तावित है।
वन विभाग के अनुसार कुल 174 हेक्टेयर आवंटित की गई है। इसमें से 56 हेक्टेयर क्षेत्र को विशेष रूप से बायोलॉजिकल पार्क के लिए आरक्षित किया गया है। शेष भूमि का उपयोग बफर जोन और अन्य सहायक कार्यों के लिए किया जाएगा। अब विभाग की प्राथमिकता जमीन के चिन्हीकरण की है, जो जल्द ही शुरू की जाएगी। इसके लिए तैयारी की जा रही है।
राज्य सरकार की बजट घोषणा को धरातल पर उतारने के लिए वन विभाग ने रफ्तार पकड़ ली है। विभाग की ओर से केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण नई दिल्ली को विस्तृत प्रस्ताव बनाकर भेज दिया गया है। वहां से आगामी दिनों में एक उच्च स्तरीय टीम चित्तौड़गढ़ का दौरा करेगी। यह टीम जमीन की स्थिति, पर्यावरण और वन्यजीवों के अनुकूल परिस्थितियों की जांच (फिजिबिलिटी चेक) करेगी। इसके माकूल पाए जाने पर बायोलॉजिकल पार्क की अनुमति प्रदान करेगी। इसके बाद टेण्डर प्रक्रिया शुरू होगी।
फिलहाल चित्तौड़गढ़ आने वाले पर्यटक केवल ऐतिहासिक किले तक सीमित रहते हैं। बायोलॉजिकल पार्क बनने से यहां 'इको-टूरिज्म' को बढ़ावा मिलेगा। इससे न केवल स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि वन्यजीव प्रेमियों और स्कूली बच्चों के लिए यह एक बेहतरीन शैक्षणिक केंद्र भी बनेगा।
बायोलॉजिकल पार्क के लिए जमीन हस्तांतरित हो चुकी है। केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण को प्रस्ताव भेजा गया है। वहां से टीम निरीक्षण के लिए आएगी, अनुमति मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-मृदुला सिंह, उप वन संरक्षक वन विभाग वन्यजीव चित्तौड़गढ़
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