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Chittorgarh: खाड़ी में जंग से डामर और LDO के भावों में लगी ‘आग’, 600 करोड़ के प्रोजेक्ट्स अधर में

Road Projects Delayed: खाड़ी देशों में छिड़े युद्ध की तपिश का असर अब कई प्रोजेक्ट पर दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में आए भूचाल ने चित्तौड़गढ़ जिले के विकास कार्यों की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। जिले में 600 करोड़ के रोड प्रोजेक्ट महंगाई के कारण अटक गए हैं।

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डामर और एलडीओ महंगी होने से रोड प्रोजेक्ट अटके, पत्रिका फोटो

डामर और एलडीओ महंगी होने से रोड प्रोजेक्ट अटके, पत्रिका फोटो

Road Projects Delayed: खाड़ी देशों में छिड़े युद्ध की तपिश अब मेवाड़ की सड़कों पर महसूस की जाने लगी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए भूचाल ने चित्तौड़गढ़ जिले के विकास कार्यों की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा कराए जाने वाले सड़कों के पेचवर्क और नए निर्माण कार्य डामर व एलडीओ की आसमान छूती कीमतों के कारण अटक गए हैं। फरवरी के बाद से ही अधिकांश काम पर ब्रेक लगा हुआ है। विभागीय अधिकारी भी इसे लेकर चुप्पी साधे हुए हैं।

दोगुने हुए दाम, बिगड़ा बजट का गणित

चित्तौड़गढ़ जिले में विकास की धुरी मानी जाने वाली सड़कों का भविष्य फिलहाल अधर में लटका नजर आ रहा है। जानकारों के अनुसार कुछ समय पहले तक जो डामर 35 से 40 हजार रुपए प्रति टन के भाव पर उपलब्ध था, उसके दाम बढ़कर 70 से 80 हजार प्रतिटन तक पहुंच गए हैं। यही स्थिति डामर को गर्म करने के लिए प्रयुक्त होने वाले लाइट डीजल ऑयल (LDO) की है।
पूर्व में 30-35 हजार रुपए में मिलने वाला 1000 लीटर एलडीओ अब 60 से 70 हजार रुपए के पार निकल चुका है। लागत में हुए इस अप्रत्याशित इजाफे ने ठेकेदारों और विभाग दोनों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। हालांकि भावों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है।

50 से अधिक प्रोजेक्ट ठप, 600 करोड़ का निवेश दांव पर

विभागीय सूत्रों के अनुसार, डामर की कमी और बढ़ती कीमतों के चलते जिले में छोटे-बड़े मिलाकर 50 से अधिक काम बंद पड़े हैं। इनमें करीब 20 से 25 बड़े प्रोजेक्ट्स शामिल हैं, जिनकी कुल लागत 500 से 600 करोड़ रुपए के बीच आंकी जा रही है। निर्माण सामग्री के दामों में वृद्धि होने से ठेकेदार भी चुप्पी साधे है।

आमजन की बढ़ी मुश्किलें

सड़कों का काम रुकने से सबसे ज्यादा परेशानी राहगीरों को होती है। पेचवर्क न होने से गहरे गड्ढ़े दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में नई सड़कों का इंतजार लंबा होता जा रहा है। ठेकेदारों के अनुसार फरवरी में युद्ध शुरू हुआ था, इसके बाद से भावों में उछाल जारी है। इसके कारण डामर के अधिकांश काम बंद पड़े है जो चल भी रहे हैं मंद गति से चल रहे हैं।

जिले में यहां अधिकांश काम ठप

विभागीय जानकारों के अनुसार रोलिया से रेलमगरा तक सड़क निर्माण कार्य, इटाली से भादसोड़ा तक सड़क निर्माण का कार्य ठप पड़ा है। इनकी लागत भी 80-90 करोड़ बताई जा रही है। इसी प्रकार, बेगूं, कपासन, चित्तौड़गढ़, रावतभाटा सहित अधिकांश जिले में काम ठप बताए जा रहे हैं।

भावों के दाम हुए दुगने, ठेकेदार हो रहे परेशान

खाड़ी देश में युद्ध के चलते डामर और एलडीओ ऑयल की रेट दुगनी हो गई है। इसके कारण निर्माण कार्य की लागत बढ़ गई है। जिले में सडक़ निर्माण और डामरीकरण संबंधित अधिकांश काम बंद पड़े हैं। कीमतों के आसमान छूने से ठेकेदार भी परेशान हो रहे हैं।
-हरीश आहुजा, अध्यक्ष जिला ठेकेदार संघ चित्तौड़गढ़

काम तो हुआ प्रभावित

जिले में सड़क निर्माण आदि के कार्य तो प्रभावित हुए हैं। इसकी पूरी जानकारी लेकर ही बता पाऊंगा।
-बी.पी.सिंह, अधीक्षण अभियंता सार्वजनिक निर्माण विभाग चित्तौड़गढ़