
नलिनी जोशी के साथ पुत्र मंगेश जोशी व उनकी बहू शुभांगी जोशी। (फोटो-पत्रिका)
चित्तौडगढ़। मदर्स-डे केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि उन माताओं के त्याग, संघर्ष और अटूट हौसले को सम्मान देने का दिन है, जो अपने बच्चों के भविष्य के लिए हर कठिनाई का सामना करती हैं। चित्तौड़गढ़ के मधुवन सेंती निवासी 80 वर्षीय नलिनी जोशी की कहानी भी ऐसी ही प्रेरणादायी मिसाल है, जिन्होंने जीवन की तमाम चुनौतियों के बावजूद हार नहीं मानी और अपने बेटे को ऊंचे मुकाम तक पहुंचाया।
महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के उमरखेड़ की रहने वाली नलिनी जोशी का विवाह वर्ष 1967 में नांदेड़ निवासी अंबादास राव जोशी से हुआ था। शादी के महज ढाई साल बाद 11 जनवरी 1970 को उनके पति का निधन हो गया। उस समय नलिनी केवल 9वीं पास थीं और उनकी गोद में सवा साल का बेटा था। परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा था और रहने के लिए खुद का घर भी नहीं था।
ऐसे मुश्किल दौर में नलिनी जोशी ने टूटने के बजाय खुद को मजबूत बनाया। उन्होंने शिक्षा को अपनी ताकत बनाया और दोबारा पढ़ाई शुरू की। सुबह चार बजे उठकर घर का काम संभालना, संयुक्त परिवार के नौ लोगों के लिए खाना बनाना, निजी स्कूल में पढ़ाने जाना और फिर घर लौटकर खुद पढ़ाई करना उनकी दिनचर्या बन गई। परिवार का खर्च चलाने के लिए वे घर पर बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाती थीं।
संघर्षों के बीच उन्होंने 12वीं, ग्रेजुएशन, एमए और बीएड की पढ़ाई पूरी की। करीब 13 साल की मेहनत के बाद वर्ष 1983 में उनका चयन सरकारी शिक्षिका के रूप में हुआ। इसी संघर्ष और मेहनत के दम पर उन्होंने अपने बेटे मंगेश जोशी को भी उच्च शिक्षा दिलाई। आज मंगेश जोशी चित्तौड़गढ़ में पशुपालन विभाग में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं।
नलिनी जोशी बताती हैं कि एक समय ऐसा भी था जब पूरे परिवार का गुजारा केवल 70 रुपए की ट्यूशन फीस से चलता था। उनकी इसी मेहनत को देखकर कॉलेज स्टाफ भी उनकी मदद करता था। कई महीनों तक उन्होंने ज्वार की रोटी और तुवर की दाल खाकर दिन बिताए।
कठिन हालात के बावजूद उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। आज नलिनी जोशी साहित्य के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना चुकी हैं। उनकी मराठी काव्य पुस्तिकाएं प्रकाशित हो चुकी हैं और उन्हें महाराष्ट्र में सम्मान भी मिल चुका है।
बेटे डॉ मंगेश जोशी अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपनी मां को देते हैं। कहते हैं मैं जो कुछ भी हूं अपनी मां की वजह से हूं। उनकी सेवा ही मेरे लिए प्रभु की आराधना है। अपने घर का नाम भी 'मातृशक्ति' रखा है जो नलिनी जोशी के त्याग और तपस्या का जीवंत प्रतीक है। नलिनी जोशी ने बताया कि उनकी बहू शुभांगी जोशी बेटी की तरह उनकी सेवा करती है। उम्र के इस पड़ाव में धन सपंदा के बजाय बेटा-बहू की सेवा जीवन का असली प्रतिफल है।
Updated on:
09 May 2026 11:13 pm
Published on:
10 May 2026 06:00 am
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