
बाडोली मंदिर की नटराज मूर्ति बॉक्स में बंद, पत्रिका फोटो
Baroli Temple Nataraja Statue: चित्तौड़गढ़ जिले के रावतभाटा स्थित प्राचीन बाडोली के शिव मंदिर से 1998 में चोरी हुई नटराज की प्रतिमा, 2020 में भारत तो लौटी, लेकिन अपने मूल मंदिर नहीं पहुंच सकी। फिलहाल नटराज की प्रतिमा किले के तोपखाने के बक्से में बंद रखी है। सुरक्षा और कई अन्य कारणों से 6 साल बीतने के बाद भी इस प्रतिमा को अपना मूल मंदिर नहीं मिल सका है।
गौरतलब है कि दसवीं-ग्यारहवीं शताब्दी की यह अनुपम कलाकृति सिर्फ पत्थर की प्रतिमा नहीं राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत का प्रमाण है। तस्करी के रास्ते ब्रिटेन पहुंची इस प्रतिमा को लाने के लिए सरकार ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। विडंबना यह कि जिस प्रतिमा को लाने के लिए 7 समंदर पार तक जोर लगाया गया उसे चित्तौड़गढ़ के तोपखाने से 125 किलोमीटर दूर बाडोली मंदिर तक पहुंचाने में प्रशासन को 6 वर्ष में भी सफलता नहीं मिली।
बाडोली मंदिर दसवीं-ग्यारहवीं शताब्दी का माना जाता है। इस परिसर में कुल 9 छोटे-बड़े मंदिर हैं। मुख्य घटेश्वर मंदिर के पश्चिम में भगवान शिव के नटराज स्वरुप को उत्कीर्ण किया गया था। जेम्स टॉड ने अपनी पुस्तक में ऐसे कई मंदिरों का उल्लेख किया है। कहा जाता है कि औरंगजेब ने हमला कर मंदिर में कई मूर्तियों को खंडित कर दिया था। बावजूद इसके आज भी मंदिर की शिल्पकला और नक्काशी सैलानियों को आकर्षित करती है।
बाडोली मंदिर से 1998 में भगवान नटराज की मूर्ति चोरों ने चुरा ली और इसे लदंन में 85 लाख रुपए में बेच दिया था। वहीं चोरों ने असली की जगह मंदिर के पास ही नकली मूर्ति छोड़ दी। 2003 में जयपुर पुलिस ने एक मूर्ति चोर गिरोह पकड़ा था। चोर गिरोह ने पुलिस को बताया कि बाडोली से चोरी हुई प्रतिमा लदंन में है। इसके बाद सरकार के प्रयासों से 10 अगस्त 2020 को प्रतिमा वापस भारत लौटी।
28 साल पहले चोरी की गई भगवान शिव की मूर्ति नृत्य करती हुई मुद्रा में नटराज के रुप में है। मूर्ति चोरों ने उस समय 85 लाख रुपए में लंदन में बेची थी। यह प्रतिमा चार फीट लंबी व 270 किलो वजनी है।
बाडोली से चोरी हुई नटराज की प्रतिमा लंदन से वापस हमारे देश में आने के बाद 15 जनवरी 2023 को दुर्ग पर आयोजित एक समारोह के साथ पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा अर्चना कर पुरातत्व विभाग को सौंपी गई। तब से लेकर आज दिन तक प्रतिमा दुर्ग के तोपखाने में एक लकड़ी के संदूक में बंद रखी हुई है।
पुरातत्व विभाग के अधिकारी रामनिवास से जब इस बारे में पूछा कि नटराज की मृर्ति दुर्ग के तोपखाने से बाडोली मूल मंदिर में कब जाएगी तो जवाब नहीं मिला। उन्होने अपने ही विभाग के दूसरे अधिकारी का नबंर दिया। जो नबंर दिया उस अधिकारी ने भी फोन नहीं उठाया। जानकारी मिली कि बाडोली मंदिर में सुरक्षा की कमी के कारण मूर्ति वहां शिफ्ट नहीं की जा रही है। विभाग अंदरखाने पहले सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने के बाद प्रतिमा शिफ्ट करेगा।
Updated on:
08 May 2026 08:21 am
Published on:
08 May 2026 08:21 am
