
दो लोगों को उम्रकैद की सजा (फोटो-एआई)
चित्तौड़गढ़: राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने मानवीय संवेदनाओं और रिश्तों को झकझोर कर रख दिया है। एक प्रेमिका ने अपने ही भाई को रास्ते से हटाने के लिए अपने प्रेमी के साथ मिलकर मौत की साजिश रची।
हालांकि, कातिल का 'ओवर कॉन्फिडेंस' भारी पड़ गया और साढ़े तीन साल पुराने इस सनसनीखेज हत्याकांड में अब कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषियों को ताउम्र जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया है।
यह कहानी शुरू होती है साल 2022 में, जब चित्तौड़गढ़ के गंगरार थाना इलाके में रहने वाले महेंद्र रायका (23) की उसकी सगी बहन तनिष्का उर्फ तनु और उसके प्रेमी महावीर धोबी ने मिलकर हत्या कर दी। महेंद्र मूल रूप से मध्यप्रदेश के मंदसौर का रहने वाला था। लेकिन वह चित्तौड़गढ़ में अपने मामा के पास रह रहा था।
महेंद्र की बहन तनु और महावीर धोबी के बीच प्रेम-प्रसंग चल रहा था। तनु अपने प्रेमी के साथ घर बसाना चाहती थी। लेकिन भाई महेंद्र इस रिश्ते के खिलाफ था। वह अपनी बहन की शादी अपनी ही बिरादरी में करना चाहता था। यही विरोध तनु और महावीर को खटकने लगा और उन्होंने महेंद्र को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने का मन बना लिया।
अपर लोक अभियोजक ममता जीनगर के अनुसार, 16 नवंबर 2022 को तनु ने एक सोची-समझी साजिश के तहत अपने भाई महेंद्र को फोन कर गंगरार चौराहे पर बुलाया। वहां महावीर धोबी और उसका साथी महेंद्र धोबी पहले से ही वैन लेकर तैयार थे। वे महेंद्र को बहला-फुसलाकर किले के पास ले गए।
वहां आरोपियों ने पहले महेंद्र के साथ बैठकर गांजा पिया। जब महेंद्र नशे की हालत में बेसुध होने लगा, तो महावीर ने सारणेश्वर मंदिर के पास सुनसान जगह पर अपने गमछे से महेंद्र का गला घोंट दिया।
सबूत मिटाने के इरादे से उन्होंने शव के हाथ-पैर बिजली के तारों से बांध दिए और रात के अंधेरे में उसे किले की पहाड़ी पर स्थित एक गहरे कुएं में फेंक दिया। कुएं में गिरते समय शव एक लोहे के एंगल से टकराया, जिससे महेंद्र का सिर धड़ से अलग हो गया।
हत्याकांड का खुलासा करीब 20 दिन बाद 5 दिसंबर को हुआ, जब कुएं से एक अज्ञात सिर कटा शव बरामद हुआ। पुलिस जांच के दौरान मुख्य आरोपी महावीर धोबी पुलिस को गुमराह करने के लिए साये की तरह उनके साथ रहने लगा। वह ऐसा दिखावा कर रहा था, जैसे वह पुलिस की मदद कर रहा हो।
यही 'ओवर कॉन्फिडेंस' उसकी बर्बादी का कारण बना। जब पुलिस कुएं से लाश निकाल रही थी और टॉर्च की रोशनी में मृतक के हाथ पर लिखे नाम को पढ़ने की कोशिश कर रही थी, तभी महावीर ने हड़बड़ी में बिना चेहरा देखे ही मृतक का नाम 'महेंद्र' बोल दिया। पुलिस को तुरंत शक हुआ कि जो नाम पुलिस नहीं पढ़ पा रही, उसे महावीर ने कैसे जान लिया? कड़ाई से पूछताछ हुई तो उसने सारा राज उगल दिया।
चित्तौड़गढ़ के अपर सेशन न्यायाधीश (संख्या 2) विनोद कुमार बैरवा की अदालत ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया। अभियोजन पक्ष ने आरोपियों के खिलाफ 33 गवाह और 96 दस्तावेजी सबूत पेश किए, जिनसे जुर्म पूरी तरह साबित हो गया।
मुख्य आरोपी महावीर धोबी और उसके साथी महेंद्र धोबी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। दोनों दोषियों पर 70-70 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया। मृतक की बहन तनु को पुख्ता सबूतों के अभाव में कोर्ट ने बरी कर दिया।
Updated on:
06 May 2026 01:54 pm
Published on:
06 May 2026 01:54 pm
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