Chittorgarh News: मानसून में अब उतना समय नहीं बचा, जिसमें नई पुलिया खड़ी हो जाए या वर्तमान की ऊंचाई बढ़ सके। इसकी वजह से इस बारिश में धनेतकलां सहित करीब दो दर्जन गांवों के ग्रामीणों की धड़कनें तेज होने लगी है।
चित्तौड़गढ़। मानसून में अब उतना समय नहीं बचा, जिसमें नई पुलिया खड़ी हो जाए या वर्तमान की ऊंचाई बढ़ सके। इसकी वजह से इस बारिश में धनेतकलां सहित करीब दो दर्जन गांवों के ग्रामीणों की धड़कनें तेज होने लगी है। बेड़च नदी पर बनी धनेत पुलिया के ऊंचाई बढ़ाने का काम सरकारी फाइलों और तकनीकी बदलावों के फेर में ऐसा उलझा है कि इस साल भी ग्रामीणों को लहरों के बीच से जान जोखिम में डालकर निकलना पड़ेगा।
विडंबना यह है कि जिसे लोग पुलिया समझकर पार करते हैं, वह असल में सिंचाई विभाग का एक एनीकट है। तकनीकी रूप से वर्तमान संरचना पुलिया नहीं, बल्कि सिंचाई विभाग द्वारा निर्मित एक एनीकट है। इसे 'काज-वे' या पाथ-वे कहते हैं। नगर परिषद ने एनीकट के ऊपर डामर की सड़क बिछा दी, जो अब मुख्य आवागमन का जरिया बन गई है।
सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता राधेश्याम जाट ने बताया कि बेस लेवल से इस एनीकट की ऊंचाई मात्र 2.3 मीटर है, जबकि पानी का भराव स्तर ही 1.6 मीटर रहता है। ऐसे में सामान्य बारिश होते ही बेड़च नदी का पानी सड़क के ऊपर से बहने लगता है और संपर्क पूरी तरह कट जाता है।
पुलिया के अवरुद्ध होने से केवल आवागमन ही प्रभावित नहीं होता, बल्कि करीब 1500 छात्र-छात्राओं का भविष्य भी दांव पर लग जाता है। धनेत, तुंबडिया, मिश्रों की पीपली, कश्मोर और घोसुंडा जैसे 24 गांवों के लोग चित्तौड़गढ़ शहर से कट जाते हैं। बीमारों को अस्पताल ले जाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है या फिर उफनती नदी के बीच से गुजरना पड़ता है।
क्षेत्रीय विधायक चंद्रभानसिंह आक्या ने पुलिया की ऊंचाई बढ़ाने और समस्या के स्थाई समाधान का दावा किया था। बजट में इसके लिए 25 करोड़ रुपए की स्वीकृति भी मिली, लेकिन धरातल पर काम शून्य है। सूत्रों के अनुसार, पुलिया निर्माण की साइट बदलने के कारण अब लागत में भारी बढ़ोतरी हो गई है। पुराना बजट अब नाकाफी साबित हो रहा है, जिसके चलते नई डीपीआर और अतिरिक्त बजट का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। शासन-प्रशासन की इस कछुआ चाल ने विधायक के दावों की भी हवा निकाल दी है।