Mewar Opium Procurement: मेवाड़ के 'काले सोने' (अफीम) की सरकारी खरीद के दूसरे दिन भी तुलाई केंद्र पर भारी उत्साह देखा गया। तुलाई केंद्रों पर कुछ काश्तकारों की अफीम 5वीं गुणवत्ता में पाए जाने पर अफसरों पर मौखिक दबाव बनाते हुए क्लास घटाने का आग्रह करते नजर आए।
Mewar Opium Procurement: मेवाड़ के 'काले सोने' (अफीम) की सरकारी खरीद के दूसरे दिन भी तुलाई केंद्र पर भारी उत्साह देखा गया। किसान अफीम की पैदावार लेकर तुलाई केंद्रों पर एकत्रित हैं तो कुछ काश्तकारों की अफीम 5वीं गुणवत्ता में पाए जाने पर अफसरों पर मौखिक दबाव बनाते हुए क्लास घटाने का आग्रह करते नजर आए।
अफीम निरीक्षक केसी कोष्टा ने बताया कि दूसरे दिन कुल 17 गांवों के 449 काश्तकार अपनी उपज लेकर पहुंचे। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, कुल 3755.390 किलो अफीम की तुलाई की गई, जिसके बदले किसानों के बैंक खातों में 60,84,500 रुपए का भुगतान तत्काल कर दिया गया है।
जिला अफीम अधिकारी बीएन मीणा के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट का सदुपयोग करने के लिए विभाग द्वारा तुलाई के साथ ही 90 प्रतिशत भुगतान हाथों-हाथ किया जा रहा है। शेष 10 प्रतिशत राशि का भुगतान भी अंतिम गुणवत्ता रिपोर्ट के बाद ही होगा। हालांकि, यह विशेष सुविधा केवल आज तक ही प्रभावी रहेगी।
1 अप्रेल से नियम बदल जाएंगे और किसानों को भुगतान के लिए नीमच फैक्ट्री की रिपोर्ट का इंतजार करना होगा। फैक्ट्री से जांच रिपोर्ट आने में सामान्यतः 7 से 8 दिनों का समय लगता है, जिसके बाद ही राशि ट्रांसफर की जाएगी।
तुलाई केंद्र पर उस समय अजीब स्थिति पैदा हो गई जब एक काश्तकार अपनी अफीम की गुणवत्ता से संतुष्ट नजर नहीं आया। जांच के दौरान काश्तकार की अफीम 'पांचवीं श्रेणी' (क्लास) में पाई गई।
इस पर किसान ने अफीम अधिकारियों पर मौखिक दबाव बनाते हुए क्लास घटाने (गुणवत्ता सुधारने) का निवेदन किया। किसान का तर्क था कि उसका पूरा परिवार इसी खेती पर निर्भर है और कम श्रेणी मिलने से उसे आर्थिक नुकसान होगा। हालांकि, अधिकारियों ने गुणवत्ता मानकों का हवाला देते हुए नियमानुसार ही कार्रवाई की बात कही।