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जयपुर में एक साथ 10 गैस सिलेंडर फटने जैसे धमाके से दहशत, तड़पता रहा मजदूर, ठेकेदार फरार

High Tension Line Accident: जयपुर में मानसरोवर की पत्रकार कॉलोनी में सोमवार सुबह खरबास सर्कल के पास निर्माणाधीन चार मंजिला कॉम्प्लेक्स में काम कर रहा मजदूर 132 केवी (एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज) लाइन की चपेट में आ गया। चश्मदीदों ने बताया कि धमाका इतना भीषण था कि लगा जैसे एक साथ 10 गैस सिलेंडर फट गए हों।

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निर्माणाधीन कॉम्प्लेक्स में हाईटेंशन लाइन से हुआ तेज धमाका, पत्रिका फोटो

निर्माणाधीन कॉम्प्लेक्स में हाईटेंशन लाइन से हुआ तेज धमाका, पत्रिका फोटो

High Tension Line Accident: जयपुर में मानसरोवर की पत्रकार कॉलोनी में सोमवार सुबह खरबास सर्कल के पास निर्माणाधीन चार मंजिला कॉम्प्लेक्स में काम कर रहा मजदूर 132 केवी (एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज) लाइन की चपेट में आ गया। चश्मदीदों ने बताया कि धमाका इतना भीषण था कि लगा जैसे एक साथ 10 गैस सिलेंडर फट गए हों। इस हादसे ने न केवल एक मजदूर की जिंदगी को संकट में डाल दिया, बल्कि जयपुर के एक बड़े हिस्से की बिजली व्यवस्था को भी ठप कर दिया।

सुबह 10:49 बजे बिहार के नालंदा निवासी मजदूर रामनाथ चौथी मंजिल पर लिफ्ट के अटके हुए तार को खींच रहा था। इसी दौरान तार उछलकर ऊपर से गुजर रही सांगानेर-मानसरोवर हाईटेंशन लाइन के इंडक्शन जोन (करंट क्षेत्र) में आ गया। पलक झपकते ही जोरदार शार्ट सर्किट हुआ और रामनाथ आग की लपटों में घिर गया। चश्मदीदों के अनुसार, धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि नीचे खड़े राहगीर और साथी मजदूर जान बचाने के लिए गलियों में भागने लगे।

ठेकेदार मौके से फरार

हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। करीब 50 फीसदी से ज्यादा झुलस चुके रामनाथ को तड़पता छोड़ ठेकेदार मौके से भाग गया। बाद में साथी मजदूर उसे लेकर एसएमएस अस्पताल पहुंचे, लेकिन कानूनी कार्रवाई के डर से उसे वहां भर्ती कराने के बजाय निजी अस्पतालों के चक्कर काटते रहे। अंततः उसे मानसरोवर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

12 किलोमीटर के दायरे में बिजली गुल

इस शार्ट सर्किट का असर इतना व्यापक था कि पत्रकार कॉलोनी, मानसरोवर से लेकर राजस्थान विधानसभा तक करीब 12 किलोमीटर के दायरे में करीब आधा घंटे बिजली गुल हो गई। डिस्कॉम के इंजीनियरों में हड़कंप मच गया, क्योंकि उनके 11 और 33 केवी के फीडर सही काम कर रहे थे। बाद में पता चला कि फॉल्ट 132 केवी की मुख्य लाइन में आया है।

व्यवस्था पर खड़े हुए गंभीर सवाल

  • अनुमति का खेल: राइट ऑफ वे के नियम के मुताबिक हाईटेंशन लाइन के केंद्र से 13.5 मीटर तक कोई निर्माण नहीं हो सकता। फिर जेडीए ने इस कॉम्प्लेक्स के निर्माण को मंजूरी कैसे दी?
  • प्रसारण निगम की अनदेखी: प्रसारण निगम के इंजीनियरों को पेट्रोलिंग के दौरान इस अवैध निर्माण का पता क्यों नहीं चला?
  • अफसरों की बेरुखी: इतने बड़े हादसे और शहर की बिजली ठप होने के बावजूद विद्युत निगम के अधिशासी अभियंता से लेकर मुख्य अभियंता तक मौके पर नहीं पहुंचे।

जिम्मेदार ये बोले

इस निर्माण के लिए हमने कोई अनुमति नहीं दी। जेडीए ने निर्माण की अनुमति दी। निगम ने ठेकेदार के खिलाफ थाने में मामला दर्ज कराया है। फिलहाल, मजदूर की स्थिति नाजुक बनी हुई है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।
हरभजन सिंह, अधिशासी अभियंता, मानसरोवर, विद्युत प्रसारण निगम

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