
चित्तौडग़ढ़. परीक्षा परिणामों का दौर है तो हर तरफ नंबरों की होड़ है। इस होड़ में ९०-९५ प्रतिशत अंक लाने वाले बच्चों को भी इसलिए निराशा है कि उनके माता-पिता की नजर में दूसरे बच्चों के उनसे अधिक है। नंबरों की ये होड़ प्रतिभाओं को तनाव देती है तो ऐसी माताएं भी है जिन्होंने बच्चों को कभी परीक्षा के नंबर पर कम होने का अहसास नहीं कराया बल्कि हमेशा यहीं हौंसला दिया कि ये नंबर कम नहीं है और तुम बहुत अच्छा कर सकते हो। चित्तौडग़ढ़ की भीलवाड़ा रोड स्थित कबीर कॉलोनी निवासी रीटा बाफना भी ऐसी ही मां है। रीटा की आगे बढऩे की प्रेरणा व बच्चों की मेहनत का संगम हुआ तो सफलता का मुकाम भी हासिल हो गया। शहर की कबीर कॉलोनी निवासी रीटा की करीब १७ साल पहले एक दुर्घटना में पति राजेश बाफना की मौत हो गई थी। उसके बाद तीन बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी आ गई थी। बच्चों की पढ़ाई से लेकर उनको पालने की चिंता भी सताने लगी थी। रीटा के अनुसार बच्चों के अंक वैसे अच्छे आते थे लेकिन कभी ये नहीं कहा कि तुम्हारे से भी ज्यादा नंबर किसीके आए है। हमेशा उनको यहीं विश्वास दिलाया कि तुम मेहनत करो सफलता अवश्य मिलेगी। इसी हौंसले की बदौलत आज एक बेटी अमीषा एमबीबीएस अंतिम वर्र्ष में अध्ययन कर चिकित्सक बनने के पथ पर है तो दूसरी बेटी अक्षा सीए फाइनल में है। बेटा भी सीए बनने का सपना लिए सीपीटी की तैयारी में लगा है।
मम्मी ने कहा कि बीमार नहीं होता तो ज्यादा नंबर आते
रीटा ने बताया कि पति की मृत्यु के बाद घर खर्च चलाना कठिन होने लगा तो मित्र ने कहा कि तुम १२वीं तक पढ़ी हुई हो बच्चों को कोचिंग पढ़ाने लग जाओ। बेटा अक्षय १२वीं कक्षा में एक पेपर से पहले बीमार हो गया था जिससे उसके कम नंबर आए थे। अक्षय के अनुसार परिणाम आने पर मां ने यहीं कहा कि मैं जानती हूं तु बीमार नहीं होता तो और अधिक नंबर आते है। कोईबात नहीं आगे मेहनत करना नंबर कोई मायने नहीं रखते है। जो नंबर आए है उनको लेकर नहीं बैठना हैअब सीए के लिए सीपीटी की तैयारी करो।