
किशन शर्मा
Rajasthan Farmer : राजस्थान में एवोकाडो की खेती की शुरुआत हो रही है। राज्य में कृषि विभाग की आत्मा परियोजना के तहत उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, राजसमन्द, प्रतापगढ़ एवं कोटा सहित करीब 12 जिलों में एवोकाडो की खेती शुरू की गई है। इसकी मांग साल दर साल बढ़ रही है। एवोकाडो को बटर फ्रूट भी कहा जाता है। इसमें हेल्दी फैट, विटामिन और मिनरल्स भरपूर मात्रा में होते हैं। हमारे शरीर के लिए बहुत फायदेमंद है। इसका बाजार भाव 200 से 500 रुपए प्रति किलो तक होता है।
हैस किस्म सबसे अधिक मांग वाली किस्म है, फल का रंग पकने पर गहरा बैंगनी या काला हो जाता है। विश्व में सबसे ज्यादा मांग इस किस्म की है। फुएटै राजस्थान के लिए उपयुक्त है। पिंकर्टन किस्म 46 डिग्री सेल्सियस भी सहन कर लेती है। इसमें 18 प्रतिशत ऑयल होता है। अर्का सुप्रीम एवं अर्का कुर्ग रवि ये आइसीएआर-आइआइएचआर की किस्मे हैं। आदर्श तापमान 20-30 डिग्री हैं। ये 45 डिग्री तापमान भी सहन कर लेती। दस अनुपात एक फीमेल और मेल पौधे लगाएं। (10 प्रतिशत) पोलीनेटर लगाएं।
इसके पौधे बीज एवं ग्राटिंग दोनों से तैयार किए जाते हैं। बीज से उगाने पर ताजे पके हुए एवोकाडो का उपयोग करें। इसकी बुवाई मानसून के दौरान कर सकते हैं। एक बार लगाने के बाद 40 साल तक उत्पादन देते हैं।
खेत की 2 से 3 बार कल्टीवेटर से जुताई करें। फिर पाटा चलाकर खेत को समतल करें। उठी हुई क्यारियां बनाएं।
दूरी रखना जरूरी है, क्योंकि इससे पौधों को पर्याप्त धूप, हवा और पोषण मिलता है। पौधे से पौधे की दूरी 3.5 मीटर एवं लाइन से लाइन की दूरी 7 मीटर रखें।
एवोकाडो एक उष्णकटिबंधीय फल है इसके लिए 20 से 30 डिग्री तापमान मध्यम गर्म और नमी वाला मौसम उपयुक्त रहता है। किस्म के हिसाब से इसकी खेती सभी राज्यों में कर सकते हैं। दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी रहती है जिसका पी.एच. 6 से 7.5 के बीच हो। खेत में पानी बिल्कुल जमा नहीं हो।
मिट्टी की जांच करवाएं फिर उसके अनुसार उर्वरकों का प्रयोग करें। सामान्यतः 20 किलो एफ. वाई. एम. एवं 100:50:50 ग्राम एनपीके प्रति वर्ष दें। उठी हुई क्यारियां बनाकर पौधे लगाएं, इससे खरपतवार प्रबंध हो जाता है। ड्रिप से पानी देना भी आसान रहता है। पौधे लगाने से पहले ड्रिप लगा दें। पहले 6 महीने पौधों की विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है।
थ्रिप्स-माइट्स के नियंत्रण के लिए नीम तेल 5 मिली प्रति लीटर पानी में मिला कर छिड़कें। जड़-सड़न होने पर ट्राइकोडर्मा या जैविक फफूंदनाशक का उपयोग करें। ग्राफ्टेड पौधे जल्दी उत्पादन देते हैं। एक पेड़ 30 से 50 किलो तक उत्पादन देता है। उत्पादन 3 साल बाद लें। फल गहरा हरा हो जाए तब तोड़ें। पत्ते-गुठलियां भी उपयोगी हैं।
सुनील कुमार खोईवाल, कृषि अधिकारी, चित्तौड़गढ़