चित्तौड़गढ़

चित्तौड़गढ़ के सांवलिया सेठ मंदिर में एक महीने में 41 करोड़ का चढ़ावा, 7 चरणों में पूरी हुई गिनती

Sanwaliya Seth Temple Donation: राजस्थान के सांवलिया सेठ मंदिर में एक माह में 41 करोड़ से ज्यादा चढ़ावा आया, साथ ही सोना-चांदी भी बड़ी मात्रा में भेंट।

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Sanwaliya Seth Temple Donation
सांवलिया सेठ मंदिर के भंडारे में नकद की गिनती Image Source: फोटो पत्रिका

चित्तौड़गढ़: राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित सांवलिया सेठ मंदिर में एक बार फिर भक्तों की आस्था ने रिकॉर्ड बना दिया। मंदिर के मासिक भंडार की सात चरणों में गिनती शुक्रवार को पूरी हुई। मंदिर में एक महीने में कुल चढ़ावा 41 करोड़ 67 लाख 38 हजार 569 रुपए इकट्ठा हुआ। नकद राशि के साथ बड़ी मात्रा में सोना और चांदी भी भगवान को अर्पित की गई।

सात चरणों में पूरी हुई भंडार की गिनती

मंदिर बोर्ड अध्यक्ष हजारीदास वैष्णव की मौजूदगी में शुक्रवार को सातवें और अंतिम चरण की गिनती पूरी हुई। अंतिम चरण में 34.51 लाख रुपए निकले। सातों चरणों की कुल गिनती के बाद भंडार से 33 करोड़ 21 लाख 63 हजार 539 रुपए नकद प्राप्त हुए। इसके अलावा मंदिर कार्यालय और मनीऑर्डर के जरिए भक्तों ने 8 करोड़ 45 लाख 75 हजार 30 रुपए अर्पित किए। दोनों को मिलाकर कुल आय 41.67 करोड़ रुपए से अधिक दर्ज की गई।

सोना-चांदी भी भेंट

नकद राशि के अलावा मंदिर को 660 ग्राम 500 मिलीग्राम सोना और 84 किलो 260 ग्राम चांदी भी भेंट स्वरूप मिली। मंदिर प्रशासन ने बताया कि हर बार की तरह इस बार भी पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता और सुरक्षा के साथ पूरी की गई। गिनती के दौरान मंदिर बोर्ड के सदस्य, कर्मचारी और बैंक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

क्यों खास है सांवलिया सेठ का दरबार

चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) का प्रसिद्ध सांवलिया सेठ मंदिर मंडफिया में स्थित है, जहां भगवान कृष्ण को सेठ (व्यापारी) के रूप में पूजा जाता है। 1840 के दशक में भोला गुर्जर नाम के एक ग्वाले ने सपना देखा कि भादसोदा और बागूंद गांव के बीच की जमीन के नीचे भगवान कृष्ण की मूर्तियां दबी हुई हैं। जब ग्रामीणों ने उस स्थान पर खुदाई की, तो उन्हें सचमुच भगवान कृष्ण की तीन मूर्तियां मिलीं। इन मूर्तियों को अलग-अलग स्थानों पर स्थापित किया गया।

एक मूर्ति को मंडफिया (जो अब मुख्य मंदिर है), दूसरी को भादसोदा, और तीसरी को मूल खुदाई स्थल पर स्थापित किया गया। मान्यता है कि यहां भगवान भक्तों के बिजनेस पार्टनर बनते हैं। भक्तों का विश्वास है कि भगवान यहां स्वयं धन के राजा के रूप में विराजमान हैं, जो अपने भक्तों की आर्थिक परेशानियां दूर करते हैं। बहुत से श्रद्धालु अपना नया व्यापार शुरू करते समय सांवलिया सेठ को अपना बिजनेस पार्टनर बनाते हैं और मुनाफे का हिस्सा मंदिर में दान करते हैं।

Published on:
25 Apr 2026 01:04 pm