
चित्तौडग़ढ़. यात्रियों को अपने गतंव्य तक पहुंचाने के लिए सरकार द्वारा रोडवेज बस सेवा संचालित की जा रही है। रोडवेज द्वारा सरकार को कमाई देना दूर अपना खर्चानिकालने के लिए भी जूझना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर परिवहन विभाग द्वारा लोक परिवहन बसों को परमिट जारी किया जा रहा है। ऐसे में रोडवेज बसों के आगे-पीछे फेरे लगाने वाली लोक परिवहन बसें रोडवेज का घाटा बढऩे का बड़ा कारण बन रही है। हाल ये है कि चुनाव आचार संहिता में भी चित्तौडग़ढ़ में प्रादेशिक परिवहन अधिकारी द्वारा लोक परिवहन की बसों के परमिट जारी हो गए। जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते चित्तौडग़ढ़ आगार को हर माह ६० लाख रुपए से अधिक का घाटा हो रहा है। अवैध रुप से चलने वाले वाहनों पर अंकुश नहीं लगा पा रहे है। पिछले माह ही परिवहन विभाग ने १० परमिट, २८ परिचक्र जारी किए। लोक परिवहन बसों को जो परमिट जारी किए उनका समय रोडवेज बसों के आगे के पीछे ही है। ऐसे में लोक परिहवन बसें रोडवेज बसों के आगे चलती है जो आगे-आगे सवारियों को लेते रहती हैऐसे में रोडवेज बसों को खाली ही दौडऩा पड़ता है। कई लोकपरिवहन बसों को परमिट ग्रामीण रुट पर होने के बाद भी नियम विरुद्ध हाईवे पर चल रही है।
एक चौथाई तक घट गई आय
रोडवेज का चित्तौड़ आगार वैसे तो कई सालों में घाटे में चल रहा है, लेकिन राज्य सरकार ने जब से लोक परिवहन बसों को संचालन शुरु किया आगार की आय हर माह २०-२५ फिसदी तक घट गई है।
परिवहन मंत्री का आश्वासन कागजों में अटका
परिवहन मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास ने पदभार संभालने के दो बाद ही राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम पहुंचे अधिकारियों व यूनियन पदाधिकारियों से वार्ता की थी। इस दौरान उन्होंने लोकपरिवहन बसों को नए परमिट जारी नहीं करने का आश्वासन दिया था, उसके बावजूद नए परमिट जारी किए गए।
अवैध वाहनों के संचालन के चलते रोडवेज आगार को घाटा हो रहा है। लोकपरिहवन संचालन शुरु होने के बाद रोडवेज आगार की आय २०-२५ फिसदी तक घट गई है।
राकेश सारस्वत, मुख्यप्रबंधक, चित्तौडग़ढ़ आगार
रोडवेज बसों के आगे परमिट जारी किए जा रहे है। उदयपुर व भीलवाड़ा रुट पर हर १५ मिनिट में बसों को संचालन हो रहा है ऐसे में लोक परिवहन को परमिट देना गलत है।
बंशीगिरी गोस्वामी, अध्यक्ष, भारतीय मजदूर संघ चित्तौडग़ढ़