भाजपा सरकार प्रदेश को बीमारू राज्य बताकर सेहत सुधारने का दावा करते-करते चली गई लेकिन अस्पातलों की सेहत आज भी नहीं सुधरी।
बीदासर. भाजपा सरकार प्रदेश को बीमारू राज्य बताकर सेहत सुधारने का दावा करते-करते चली गई लेकिन अस्पातलों की सेहत आज भी नहीं सुधरी। बीदासर अस्पताल भी किसी बीमार से कम नहीं हैं। यहां न तो पूरे चिकित्सक हैं और न ही पूरी दवाएं मिलती हैं। इसके कारण ३० बेड के राजकीय गोवर्धन प्रसाद टांटिया सामुदायिक स्वास्थय केन्द्र में आने वाले दर्जनों मरीजों को आधा-अधूरा उपचार व आधी-अधूरी दवाएं मिल रही हैं। सीएचसी में अव्यवस्था के कारण ही क्षेत्र के मरीजों का मोह भंग होता जा रहा है। ऐसे में कांग्रेस सरकार से एक बार फिर सुधार की आस लोगों में जगी है। चिकित्सकों के छह पद सृर्जित हैं। इसमे कनिष्ठ विशेषज्ञ सर्जन व कनिष्ठ विशेषज्ञ मेडिसन के पद कई वर्षों से खाली पड़े हैं तथा इन चिकित्सकों के विरुद्ध लगाए गए चिकित्सकों के स्थानांतरण भी अक्टूबर २०१८ में हो गया था। अब मात्र दो चिकित्सकों के भरोसे चिकित्सा व्यवस्था चल रही है। सीएचसी में चिकित्सकों के पद खाली होने के कारण आने वाले रोगियों को दिखाने के लिए कई घण्टों तक लाइन में खड़े रहकर इंतजार करना पड़ता है। कनिष्ठ विशेषज्ञ सर्जन का पद पांच साल से तथा कनिष्ठ विशेषज्ञ मेडिसन का पद चार साल से खाली होने से गम्भीर व दूर्घटनाग्रस्त आने वाले रोगियों को भंयकर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गम्भीर हालात में आने वाले रोगियों को प्राथमिक उपचार के बाद रैफ र कर दिया जाता है। वहीं नर्सिंग कर्मचारियों का भी अभाव खटक रहा है। इससे भर्ती मरीजों को देखभाल में ंपरेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सीएचसी में एक मेल नर्स प्रथम को चाड़वास तथा एक मेल नर्स द्वितीय को सुजानगढ़ ब्लॉक सीएमएचओ कार्यालय में डेपुटेशन पर लगा रखा है। दो जीएनएम द्वितीय में से एक जीएनएम 19 नवंबर से विभागीय टे्रनिंग में दो साल के लिए सीकर तथा एक जीएनएम चाइल्ड केयर अवकाश पर चल रही है।दो मेल नर्स के पद खाली पड़े हैं।
महीनों से एक्स-रे व इसीजी भी बंद
सीएचसी स्तर पर ३७ प्रकार की जांच होनी चाहिए जबकि मुख्यमंत्री निशुल्क जांच योजना के तहत वर्तमान में ३५ प्रकार की जांच ही हो रही है। जांच योजना के तहत रेडियोग्राफ र का पद खाली होने से एक्स-रे मशीन व ईसीजी नहीं हो रही है। इसके चलते रोगियों को एक्स-रे व ईसीजी की जांच निजी लैबो में महंगे दाम देकर करवानी पड़ रही है। रोगियों को निशुल्क जांच का लाभ दो वर्षों से नहीं मिल रहा है।
210 में से 130 दवाएं ही मिल रही
सीएचसी में २१० प्रकार की दवाईयां स्वीकृत हैं जबकि १३० से १४० प्रकार की दवाईयां आ रही हैं। निशुल्क दवा केन्द्र पर पेंटाप्रॉजोल, डोमपेरीडोम कैप्सूल की मांग के अनुसार कई वर्षों से पूर्ति नहीं हो रही है। वहीं खांसी की कफ सीरप व पेरासिटॉमोल तथा डाईक्लोजेल दर्द की ट्यूब की भी गत तीन माह से नाम मात्र की सप्लाई आने के कारण इन दवाईयों का अभाव खटक रहा है। सीएचसी मे रोजाना ३०० से ३५० रोगी आते हैं। उल्लेखनीय है कि पूर्व चिकित्सा मंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने १६ सितंबर २०१६ को मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के बने भवन के उद्घाटन के समय सीएचसी को ५० बैड करने की घोषणा की थी लेकिन घोषणा पर आज तक अमल नहीं हुआ। चिकित्सकों व कर्मचारियों की कमी तथा सीएचसी को ५० बेड की करने की मांग को लेकर माह जून २०१८ में भाजपा पार्षद बेगराज नाई ने सीएचसी के सामने २५ दिनों तक धरना-प्रर्दशन व अनशन किया इसके बावजूद भी समस्यां का कोई हल नहीं हुआ। ये बड़ी विडम्बना की बात है।