
चूरू.
एड्स की रोकथाम पर अपेक्षित नियंत्रण नहीं लगने का एक बड़ा कारण पॉजीटिव महिला-पुरुषों की अनदेखी बन रही है। सामाजिक कुरीतियों से बचने के लिए पॉजिटिव रोगी इसे छुपा कर रखते हैं। अकेले चूरू जिले में प्रतिवर्ष एड्स पॉजिटिव अनेक महिलाएं गर्भवती हो रही हैं और कई बच्चों को भी जन्म दे रही हैं। इसमें कुछ बच्चे पॉजिटिव तो कु छ नेगेटिव पैदा हो रहे हैं। यह स्थिति एक खतरनाक संकेत है। साथ पूरे परिवार को भी ये टेंशन रहती है कि गर्भ में पल रहे बच्चे को एचआईवी एड्स से कैसे बचाया जाए।
चूरू के राजकीय डेडराज भरतिया अस्पताल के आंकड़ों पर नजर डालें तो यहां हर वर्ष दो से तीन एड्स पॉजिटिव महिलाएं गर्भवती हो रही हैं। इसके अलाव दो से तीन महिलाएं प्रतिवर्ष गर्भवती जांच के दौरान एचआईवी/एड्स पॉजिटिव मिल रही हैं। वर्तमान में 323 एड्स रोगी एआरटी सेंटर में पंजीकृत हैं। इसमें 130 महिला, 163 पुरुष, 17 बालक व 13 बालिकाएं हैं।
4 साल में 5 पॉजिटिव महिलाएं हुई गर्भवती
वर्ष 2015-16
एक एड्स पॉजीटिव महिला ने बच्चे को जन्म दिया और बच्चा भी पॉजिविट पाया गया।
वर्ष 2016-17
तीन एड्स पॉजीटिव महिलाएं गर्भवती हुई। इसमें से एक गर्भवती की मौत हो गई। एक गर्भवती यहां से पलायन कर गई। इसके अलावा गर्भवती जांच के दौरान दो महिलाएं पॉजीटिव मिली। दोनों के बच्चे व एक पॉजिटव गर्भवती महिला का बच्चा नेगेटिव आया।
वर्ष 2017-18
एक महिला पॉजिटिव होने के बाद गर्भवती हुई। दो महिलाएं गर्भवती होने के बाद जांच में एड्स पॉजिटिव पायी गई। इसमें से दो का कुछ माह में ही गर्भपात हो गया। एक बच्चा पैदा हुआ जो नेगेटिव है।
वर्ष 2018-19
एक महिला गर्भवती होने के बाद हुई जांच में पॉजिटिव पायी गयी। 15 महिला-पुरुषों में से एक ही पॉजिटिव पॉजीटिव महिला पुरुषों में 15 पति-पत्नी ऐसे हैं जिनमें से केवल एक ही पॉजिटिव है। पत्नी पॉजिटिव है तो पति नहीं पति है तो पत्नी नहीं।
जानकारी के मुताबिक नौ पुरुष पॉजिटिव हैं, जिनकी पत्नियां नेगेटिव हैं और छह महिलाएं पॉजिटिव हैं जिनके पति नेगेटिव हैं। ऐसे महिला-पुरुषों को संक्रमण नहीं फैले इसका विशेष ध्यान रखना चाहिए।
HIV के बारे में CHURU एक्सपर्ट व्यू
-गर्भधारण करने वाली एचआईवी/एड्स पॉजिटिव महिलाओं के बच्चों में 15 से 45 प्रतिशत संक्रमण फैलने की आशंका रहती है।
-गर्भवस्था व स्तनपान के दौरान उक्त वायरस शिशु की शरीर में जा सकते हैं।
-इसे रोकने के लिए नाको की ओर से पीपीटीसीटी कार्यक्रम चलाया जा रहा है।
-इसके तहत गर्भावस्था के दौरान मां व जन्म के बाद शिशु को दवा दी जाती है।
-इससे नवजात में संक्रमण फैलने से रोका जा सकता है। चूरू में भी एड्स पॉजिटिव महिलाओं के लिए यह सुविधा उपलब्ध है।
-डा. हनुमान जयपाल, विभागाध्यक्ष, मेडिसिन विभाग, मेडिकल कॉलेज, चूरू