Churu Desert Vegetation: वनस्पति संपदाओं के धनी मरुस्थलीय जिला की भूमि का सदाबाहर पौधा है खींप, जो न केवल हरा कचनार दिखने वाला पौधा है बल्कि आयुर्वेद में इसे रामबाण दवा माना गया है। बंसत ऋतु में खींप की फलिया खींपोळी हर किसी की चाहत बनी हुई और जिसे खींपोळी मिल जाए तो वह इसकी सब्जी का चाव से रसास्वादन करता है।
Churu Desert Vegetation: वनस्पति संपदाओं के धनी मरुस्थलीय जिला की भूमि का सदाबाहर पौधा है खींप, जो न केवल हरा कचनार दिखने वाला पौधा है बल्कि आयुर्वेद में इसे रामबाण दवा माना गया है। बंसत ऋतु में खींप की फलिया खींपोळी हर किसी की चाहत बनी हुई और जिसे खींपोळी मिल जाए तो वह इसकी सब्जी का चाव से रसास्वादन करता है। यह एक गुणों से युक्त पौधा है फिर भी इसकी इस कदर उपेक्षा हुई है कि यहा अब खेतों में बहुत कम दिखाई दे रहा है।
मरुभूमि के गीतकारों ने गीतों में खींप को महत्व दिया है। तभी तो इन दिनों थळी अंचल में खींपोळी म्हारी खींपा छाई… तारा छाई रात गीत गूंज रहे हैं। दिन दिनों महिलाएं न केवल गौरी का पूजन कर रही है बल्कि प्रकृति की आराधना में गीतों के माध्यम से खींप की महिमा रेखांकित कर रही है। लोक गीतों में रची बसी मरुस्थलीय वनसंपदा में खींपोळी का अनुठा स्थान है और आयुर्वेद की दवा में इसका उपयोग किया जाता है।
चूरू के निकटवर्ती गांव रामसरा में खेत खेजड़ी तौरई अभियान अन्तर्गत खीपोळी दिवस मनाया गया। वह इसलिए की इसके प्रति लोग जागरुक हो। क्योंकि खींप इतना उपयोगी है कि इसका रस व्यक्ति के चुभा कांटा बिना सुई निकाल देता है। खींप घरेलु कार्य में उपयोगी है, इसकी झाडू बनती है जिसे लोकभाषा में भूंगरा करते है तो इसकी छान झोपड़ी बनती है तो खेत की सींव में खेती का सुरक्षा कवच भी बनता है।
खेत में फसलों के लिए किसी उर्रवरा से कम नहीं है। इसकी जड़ में लगने वाले पौधे अच्छे फलते फूलते हैं। खींप का गूंथला, जो एक मजबूत रस्सी होती है। बुधराम नायक कहते हैँ कि खींपोळी को सुखाकर इसका बारहमासी उपयोग किया जा सकता है। इसके सेवन से व्यक्ति की हारी बीमारी दूर हो जाया करती है।
खींपोळी की सब्जी स्वास्थ्य के लिए अच्छी होती है। इन दिनों जो भी इसकी सब्जी का सेवन करता है वह वर्षभर निरोग रहता है। क्योंकि खींपोळी की सब्जी पाचक, कब्जनाशक, दर्द निवारक और पोष्टिक होती है। हालांकि यह पौधा पेशेवार नहीं बन पाया है लेकिन अभी बाजार में खींपोळी 300 रुपए प्रति किलो में मिल रही है। यदि किसान इसे पेशा बना ले तो यह एक अतिरिक्त आय का साधन हो सकता है।
- एडवोकेट रामेश्वर प्रजापति संयोजक, खेत खेजड़ी तौरई अभियान चूरू
आयुर्वेद में खींप को प्रसारिणी कहता जाता है। यह एक औषधि है, खींप के पौधे की छडि़यों को कूट कर पानी और सरसो के तेल में बराबर मात्रा में पकाकर एक साथ बर्तन में उबालकर पानी उलने के बाद छान कर इसकी मालिश करें तो यह र्दद निवारक का काम करता है। यह एक ऐसा गुणकारी पौधा है खींप जो व्यक्ति को निरोग रखने में सक्षम है। वर्तमान में इस पौधों को संरक्षण की दरकार है।
- वैद्य गोविंद प्रसाद शर्मा, रामसरा चूरू