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मरती हुई टेस्ट क्रिकेट को, नई उम्मीद दे गए ये दो टेस्ट

ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड को मिली हालिया हार टेस्ट क्रिकेट के लिए जीवनदान साबित हो सकती है। 
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Updated: 2 Sep 2017, 4:00 PM IST
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नई दिल्ली। पांच दिनों तक चलने वाला टेस्ट क्रिकेट पिछले कुछ दशकों से पतन की अग्रसर है। क्रिकेट के इस सबसे पुराने प्रारूप में अब न तो दर्शकों की अभिरुचि रह गई हैं, न ही इसे पर्याप्त प्रसारक और प्रायोजक मिल रहे हैं। यही कारण है कि पिछले कुछ सालों से टेस्ट मैच लगातार घाटे का सौदा साबित होता जा रहा है। रियल क्रिकेट की इस र्दुगति से कई पूर्व खिलाड़ी भी मायूस हैं। कई बार सीनियर खिलाड़ियों ने इसे फिर से जिंदा करने की कोशिश भी की। हालांकि ये कोशिशें नाकाफी साबित हुई। अभी हाल ही में जब टेस्ट क्रिकेट की दो धुरंधर टीम अपने से कमजोर टीम के खिलाफ मुकाबला हारी, तो अनायास ही यह सवाल सामने आ गया है कि क्या ये दो हार टेस्ट क्रिकेट के लिए जीवनदान साबित होगी?

एशेज खेलने वाली टीमों की हार
हाल ही में एशेज खेलने वाली दोनों टीमों को टेस्ट क्रिकेट में हार नसीब हुई। ऑस्ट्रेलिया की टीम को बांग्लादेश की टीम ने हराया। जबकि इंग्लैंड की टीम को वेस्डइंडीज के हाथों शिकस्त झेलनी पड़ी। इन मुकाबलों की खास बात यह रही कि एक ओर जहां बांग्लादेश ने पहली बार ऑस्ट्रेलिया को टेस्ट में हराया। वहीं वेस्डइंडीज की टीम ने 17 साल के बाद इंग्लैड की सरजमी पर जीत हासिल की।

अप्रत्याशित परिणाम से बढ़ी उम्मीदें
टेस्ट क्रिकेट की दयनीय हालत के पीछे एक सबसे बड़ी वजह यह थी कि दर्शक मुकाबले का आखिरी परिणाम पहले ही भांप जाते थें। इस कारण मैच में रोमांच नहीं रह पाता था। हालांकि पिछले दोनों मुकाबलों में जिस तरह से अप्रत्याशित परिणाम सामने आए, उसे टेस्ट क्रिकेट के लिए शुभ संकेत माना जा रहा है।

टेस्ट खेलने वाले टीमों का प्रदर्शन
पिछले दशकों में टेस्ट मैचों से जैसे परिणाम सामने आए, उससे टेस्ट खेलने वाली 12 टीमें दो स्पष्ट ग्रुप में बटी दिखी। एक तरह भारत, दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैड, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, और पाकिस्तान की टीमें है। जबकि दूसरी ओर श्रीलंका, वेस्डइंडीज, बांग्लादेश, अफगानिस्तान और अन्य टीमें हैं। अक्सर ग्रुप ए की टीमें आपस में भिड़ा करती हैं। जबकि ग्रुप बी की टीमें भी आपस में ही मुकाबला करती हैं। ऐसी स्थिति में क्रिकेट विशेषज्ञों ने यह सलाह दी थी कि प्रत्येक दो साल के बाद ग्रुप में टीमों की स्थिति को बदला जाए। हालांकि यह संभव नहीं हो पाया।

टेस्ट क्रिकेट की सीरीज
आईसीसी ने 2013 में टेस्ट क्रिेकेट में एक सीरीज शुरू करने की बात की थी। यह सीरीज आईसीसी चैपिंयस ट्राफी की जगह लेती। इसमें टेस्ट खेलने वाली सभी टीमों के बीच मुकाबला होने की बात की गई थी। हालांकि आईसीसी के इस सलाह को प्रसारकों का साथ नहीं मिला। लिहाजा यह सीरीज कोरी कल्पनाओं में ही रह गई।

रोमांच के बिना जीवनदान संभव नहीं
टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैड की हार ने दर्शकों में फिर से रोमांच पैदा किया है। जो किसी भी खेल आयोजन को सफल बनाने की बुनियाद होती है। अब अहम यह है कि इस रोमांच को कैसे बचाए रखा जाए? आईसीसी के साथ-साथ टेस्ट क्रिकेट के प्रशंसक भी यह चाहते है कि टेस्ट क्रिकेट फिर से जिंदा हो। लेकिन क्या ऐसा संभव हो पाएगा, यह तो भविष्य की गर्भ में है।

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