
Vaibhav Sooryavanshi: 15 साल के वैभव सूर्यवंशी व्हाइट बॉल क्रिकेट में खुद को पहले ही साबित कर चुके हैं। अब वह रेड बॉल क्रिकेट में भी ऐसा करने का प्रयास कर रहे हैं। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को उन पर पूरा भरोसा है। इसी वजह से उन्हें दलीप ट्रॉफी में ईस्ट जोन की कप्तानी सौंपी गई है। सोमवार को वैभव ने सेंट्रल जोन के खिलाफ 92 रन की धमाकेदार पारी खेलते हुए बोर्ड के विश्वास को कायम रखा। लेकिन, वह एक बार फिर नर्वस नाइंटी का शिकार हुए और शतक से चूक गए। अगर वह दूसरी पारी में शतक पूरा कर लेते तो सचिन तेंदुलकर का एक बड़ा रिकॉर्ड तोड़ देते, जो दलीप ट्रॉफी में करीब 36 साल पहले बना था। हालांकि, अभी वैभव के पास इस रिकॉर्ड को इस टूर्नामेंट में तोड़ने का एक नहीं, बल्कि तीन मौके हो सकते हैं। बशर्ते उनकी टीम फाइनल के लिए क्वालीफाई करे।
दलीप ट्रॉफी के पहले सेमीफाइनल में सेंट्रल जोन के खिलाफ ईस्ट जोन के लिए वैभव सूर्यवंशी ने मुश्किल विकेट पर 81 गेंदों का सामना करते हुए 92 रनों की बेहद शानदार पारी खेली। उन्होंने इस पारी में सात चौके और सात गगनचुंबी छक्के लगाए। 92 पर पहुंचने के बाद वह आराम से अपना शतक पूरा कर सकते थे, लेकिन वह हमेशा की तरह अपनी बजाय टीम के लिए खेलते हुए छक्के के लिए गए और बाउंड्री पर कैच आउट हो गए। इस तरह वह शतक से चूक गए।
वैभव शतक लगाते ही दलीप ट्रॉफी में सबसे कम उम्र के बल्लेबाज बन सकते हैं। सेंचुरी के साथ ही वह सचिन तेंदुलकर को पीछे छोड़ देंगे, जिन्होंने दलीप ट्रॉफी 1990/91 में 17 साल 262 दिन की उम्र में शतक लगाया था। वैभव के निशाने पर अब इसी मैच की दूसरी पारी में सचिन का यह रिकॉर्ड होगा। अगर वह फिर चूकते हैं तो खिताबी मुकाबले में टीम के पहुंचने पर फिर से उनके पास दो मौक और होंगे।
वैभव सूर्यवंशी अगर सेंट्रल जोन के खिलाफ दूसरी पारी में शतक लगाते हैं, तो वह प्रथम श्रेणी क्रिकेट में ऐसा करने वाले दूसरे सबसे कम उम्र के भारतीय बल्लेबाज बन सकते हैं। इस मामले में भी वह सचिन का रिकॉर्ड तोड़ेंगे। सचिन ने 1988 की रणजी ट्रॉफी में 15 साल 230 दिन की उम्र में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में शतक जड़ा था। हालांकि इस मामले फिर भी नंबर-1 पर पंजाब के ध्रुव पांडोव ही रहेंगे। ध्रुव रणजी ट्रॉफी 1988-89 के सीजन में सबसे कम उम्र में शतक बनाने वाले बल्लेबाज बने थे। जब उन्होंने सिर्फ 14 साल और 293 दिन की उम्र में ये कमाल किया था।