एसपी की सक्रियता से टीम ने कुछ घंटों में कर दिया मामले का पटाक्षेप
दमोह. शहर के सर्किट हाउस पहाड़ी पर गुरुवार दोपहर करीब २.३० एक नवविवाहिता का शव मिला है। एसपी ने निरीक्षण के बाद हत्या का अंदेशा व्यक्त किया गया। जिसमें देर शाम महिला की शिनाख्त होने के बाद आरोपी तक पहुंचने में पुलिस को देरी नहीं लगी। और प्रथम दृष्टया जब पति को हिरासत में लिया गया तो उसके पास से महिला की स्कूटी व उसका पर्स भी बरामद कर लिया गया।
गुरुवार दोपहर करीब २.३० के लगभग सर्किट हाउस पहाड़ी पर मित्रों के साथ घूमने गए गार्ड लाइन निवासी सत्यम चौबे ने बताया कि वह अपने मित्रों के साथ जब पहाड़ी पर घूमने गया तो वहां पर किसी लड़की का शव पड़ा हुआ था। जिसकी जानकारी उसने तुरंत ही वाहन डायल-१०० तथा कोतवाली पुलिस को दी। घटना की जानकारी के बाद एसपी हेमंत चौहान भी मौके पर पहुंचे। जिन्होंने महिला के शव को देखने के बाद प्रथम दृष्टया गला दबाकर हत्या होने की आशंका जताई।
ऐसे हुई पहचान -
एसपी हेमंत कुमार ने बिना देर किए मौके पर एएसपी विवेक कुमार लाल को भेज दिया था उसके बाद वह स्वयं भी मौके पर पहुंचे। जहां पर उन्होंने महिला की शिनाख्ती के लिए तुरंत की सोशल मीडिया पर फोटो वायरल करने के निर्देश दिए। इसके बाद देर शाम तक वायरल फोटो परिजनों तक पहुंची, तथा बेटी के घर पर नहीं पहुुंचने पर परिजन तुरंत ही कोतवाली पहुंचे। जिन्होंने न केवल बेटी की पहचान कर ली बल्कि उसकी हत्या का अंदेशा उसके पति पर जताया तो एएसपी विवेक कुमार लाल ने तुरंत ही आरोपी पति की तलाश शुरू कराई और पति को महिला की स्कूटी तथा उसके किताबों के बैग को बरामद कर आरोपी को हिरासत में ले लिया। भरण पोषण के मामले में धारा १२५ का मामला चल रहा था।
पिछले डेढ़ साल से मायका में रह रही थी -
सर्किट हाउस पर मिले शव की पहचान मनीषा पति संतोष रैकवार (२२) निवासी सिविल वार्ड के रूप में की गई है। महिला की पहचान उसके पिता नन्हे लाल रैकवार द्वारा किए जाने के बाद उन्होंने बताया कि उनकी बेटी मनीषा कम्प्यूटर कोचिंग के लिए सिविल वार्ड में स्कूटी से जाती थी। उसकी ससुराल सिविल वार्ड में ही सिविल वार्ड में थी, मायका मुकेश कॉलोनी में था। मनीषा का विवाह ३ साल पहले हुआ था। लेकिन जब वह तीन माह की गर्भवती थी और पति आए दिन शराब पीकर मारपीट करता था तो वह परेशान होकर मायका मे रहने लगी थी। बाद में भरण पोषण का प्रकरण भी न्यायालय में लगाया था। आरोपी पति उसे फोन पर फिर भी परेशान करता था। भरण पोषण के मामले में १३ मार्च को पेशी होना थी। लेकिन इसके पूर्व ही जब मनीषा कोचिंग गई तो उससे पति ने मुलाकात की और उसी की स्कूटी पर बिठाकर वह सर्किट हाउस ले गया। जहां पर उसने उसी की चुनरी से गला दबाकर हत्या कर दी। बाद में आरोपी पति संतोष रैकवार उसी की स्कूटी तथा कोचिंग के बैग को लेकर फरार हो गया। बाद में जब नन्हें रैकवार कोतवाली पहुंचा और पति पर आशंका जताई तो चार घंटे के भीतर की पूरे मामले का पर्दाफाश हो गया। आरोपी पति को पुलिस ने हिरासत में लेकर उसके कब्जे से मनीषा की स्कूटी, कोचिंग का बैग भी बरामद कर लिया।
बिन मां की हो गई मासूम -
मनीषा की ९ माह की एक बेटी भी है। जो कोचिंग से आने का मां का इंतजार कर रही थी। लेकिन उस अबोध को यह नहीं मालूम था कि वह पैरों पर खड़े होने से पहले ही अनाथ हो जाएगी। नौ माह की मासूम अपनी मां की मौसी अर्थात नानी की गोद में खेलती रही। जिसे कोतवाली में यह नहीं मालूम था कि उसकी नानी उसे लेकर क्यों पहुंची हैं।
टीम की मेहनत से हो सका पर्दाफाश -
एएसपी विवेक कुमार लाल के नेतृत्व में पूरी टीम ने सक्रियता के साथ मेहनत की है। जिससे आरोपी तक पुलिस की टीम पहुुंची और आरोपी को हिरासत में लिया गया। इसमें सोशल मीडिया व सायबर सेल टीम का सहयोग भी रहा।
हेमंत चौहान -एसपी दमोह