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मौत के बाद कचरा गाड़ी में शव, कचरा स्थल पर ही दफनाया, नगर परिषद की करतूत ने किया शर्मसार

MP News: मध्य प्रदेश के दमोह जिले में सामने आया दिल दहला देने वाला मामलास, प्रशासन की संवेदनहीन शर्मसार करने वाली करतूत उजागर, मानवाधिकार आयोग और सुप्रीम कोर्ट के नियम भी किए दरकिनार

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दमोह

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Sanjana Kumar

May 11, 2026

MP News Dead body in garbage vehicle Ashamed

MP News Dead body in garbage vehicle Ashamed: मन को विचलित कर ने वाली ये तस्वीरें देख कर प्रशासन की संवेदनशीलता पर उठे सवाल? (photo:patrika)

MP news: मध्यप्रदेश के दमोह जिले के तेंदूखेड़ा में नगर परिषद की कारगुजारी ने मानवता को शर्मसार कर दिया है। एक अज्ञात शव को लावारिस घोषित करते हुए, जहां कचरा गाड़ी में डालकर ले जाया गया, वहीं शव को कचरा निपटान स्थल पर ही दफना दिया गया।

यह है पूरा मामला

दरअसल बगदरी के जंगल में पेड़ से लटका 4-5 दिन पुराना अज्ञात शव मिला। पुलिस ने शिनाख्त की कोशिश की, लेकिन मृतक की पहचान नहीं हो सकी। पुलिस ने शव को लावारिस घोषित कर नगर परिषद को शव दफनाने का मेमो दे दिया। बस! फिर क्या नगर परिषद के कर्मचारियों कचरे से भरी गाड़ी में शव रखा। शनिवार शाम खकरिया मार्ग पर वार्ड-9 स्थित सांदीपनि विद्यालय एवं कॉलेज के पास वहां दफना दिया, जहां कचरा निपटान होता है।

सम्मानजनक व्यवहार किया जाना था

नगर के महाराज सिंह, सुखदेव का कहना है कि शव भले लावारिस हो, लेकिन गरिमा के साथ दफनाना चाहिए था। इस घटना ने शासन-प्रशासन की व्यवस्थाओं और संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताते हैं, नगर परिषद के पास शव वाहन नहीं है। कर्मी मजबूरन शव कचरा ट्रैक्टर-ट्रॉली ले गए। उधर तेंदूखेड़ा नगर परिषद सीएमओ प्रेमसिंह चौहान का कहना है, कर्मचारियों ने ऐसा क्यों किया, पता करता हूं। कार्रवाई की जाएगी।

स्थानीय लोगों ने कहा संवेदनहीन होता समाज और प्रशासन

बता दें कि भारत एक ऐसा देश है जहां अज्ञात या लावारिस शवों के अंतिम संस्कार के लिए भी सम्मानजनक प्रक्रिया तय की गई है। मानवाधिकार आयोग और सुप्रीम कोर्ट भी इसे लेकर कई बार कह चुके हैं कि हर व्यक्ति को मृत्यु के बाद गरिमा मिलनी चाहिए। नियमानुसार इसके लिए अलग से शव वाहन और सुरक्षित स्थान तय किए जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शव को कचरा गाड़ी में ले जाना और कचरा स्थल पर ही दफनाना अमानवीयता और भावना शून्यता है। उनका सवाल है कि हमारे समाज और प्रशासन की संवेदनशीलता कहां खोती जा रही है।

पहचान नहीं तो क्या हुआ, किसी का तो अपना होगा ये अज्ञात

जिस शव को लावारिस घोषित करते हुए नगर परिषद ने इस तरह दफनाया वो किसी का तो अपना होगा, उसका अपना कोई परिवार तो होगा। कई बार गुमशुदगी, मानसिक बीमारी और मजदूरी के लिए लोग पलायन करने को मजबूर होते हैं, परिवार टूटने पर उससे अलग रहते हैं। लेकिन अगर ऐसे मामलों में शव की पहचान नहीं हो सकी, तो क्या उसके साथ ऐसा व्यवहार किया जाना सही है? दुनिया छोड़ चुके इन लावारिस लोगों के परिवार बरसों तक इनके लौटने का इंतजार करते हैं।

इधर में नगर निरीक्षक के स्टेटमेंट ने भी चौंका दिया है। उनका कहना है कि शव ज्यादा पुराना है इसलिए नगर परिषद को पत्र लिखकर उसे दफनाने को कहा था। शव ले जाना और दफनाना परिषद का काम है। उनके इस जवाब ने स्पष्ट कर दिया है कि अंतिम संस्कार चाहे जैसे हुआ हो, जैसे उन्हें इससे कोई मतलब ही नहीं था।

जानें क्या बोले नगर निरीक्षक?

ज्यादा पुराना शव होने के कारण मैने नगर परिषद को पत्र लिखकर दफनाने को कहा। शव ले जाना, दफनाना परिषद का काम है।

-रविद्र बागरी, नगर निरीक्षक