दमोह

बजट के पहले: शिक्षा क्षेत्र में ठहराव, न नई पहल न स्थाई समाधान

दमोह. पिछले बजट से लेकर मौजूदा वित्तीय वर्ष तक शिक्षा के क्षेत्र में बड़े दावों के बावजूद जमीनी हकीकत में कोई खास बदलाव नजर नहीं आया। स्कूल से लेकर कॉलेज तक व्यवस्थाएं लगभग स्थिर बनी रहीं। न नियमित शिक्षकों की नियुक्ति हो सकी, न ही छात्रों को ऐसी नई योजनाओं का लाभ मिला, जिससे शिक्षा […]

2 min read
Jan 21, 2026
AI Generated Image

दमोह. पिछले बजट से लेकर मौजूदा वित्तीय वर्ष तक शिक्षा के क्षेत्र में बड़े दावों के बावजूद जमीनी हकीकत में कोई खास बदलाव नजर नहीं आया। स्कूल से लेकर कॉलेज तक व्यवस्थाएं लगभग स्थिर बनी रहीं। न नियमित शिक्षकों की नियुक्ति हो सकी, न ही छात्रों को ऐसी नई योजनाओं का लाभ मिला, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होता। जिले में शिक्षा से जुड़े युवा और छात्र-छात्राएं आज भी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं।
पिछले बजट में शिक्षा क्षेत्र के लिए कुछ घोषणाएं जरूर की गई थीं, लेकिन दमोह जिले में उनका असर सीमित रहा। दमोह में मेडिकल कॉलेज, पीएमश्री कॉलेज, सांदीपनि स्कूल जैसी संस्थान तो मिले, लेकिन इनके लिए कोई नया स्टाफ अब तक नहीं मिल सका है। स्कूल, कॉलेज शिक्ष हो या चिकित्सा शिक्षा इसमें दमोह में कोई अपडेट इस पूरे साल में नहीं मिल सका है, जिससे के जिले के बच्चों को इसका लाभ मिल सके। अब भी शहर के हजारों बच्चे दूसरे शहरों, राज्यों में अपने परिजनों से दूर रहकर पढऩे मजबूर हैं।

सरकारी क्षेत्र में पूरे साल रहा बजट का रोना
बजट में स्कूल, कॉलेज की मरम्मत और निर्माण की राशि रखी गई थी, लेकिन पूरे साल सरकारी स्कूलों की मरम्मत कार्य के लिए बजट का रोना रहा। खनिज मद से स्कूलों का बजट लेना पड़ा, उसके बाद ही कुछ स्कूलों में रूटीन मरम्मत और रंग रोगन तक काम सिमट कर रह गया। डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट क्लास या लैब विस्तार जैसे प्रयास अपेक्षित स्तर पर नहीं हो पाए।

कॉलेज से लेकर स्कूल तक संभाल रहे अतिथि
कॉलेजों में नए कोर्स, स्किल डेवलपमेंट या रिसर्च सुविधाओं को लेकर कोई ठोस पहल नहीं दिखी। इसका नतीजा यह रहा कि छात्रों को न तो नई सुविधाएं मिलीं और न ही रोजगार से जोडऩे वाली शिक्षा का विस्तार हो सका। न नियमित शिक्षकए न नई भर्तियां हुई। जिले के कई सरकारी स्कूल आज भी अतिथि शिक्षकों और सीमित स्टाफ के भरोसे चल रहे हैं। विषयवार शिक्षकों की भारी कमी है। एक ही शिक्षक को कई कक्षाओं और विषयों का भार उठाना पड़ रहा है। शिक्षा विभाग में नई नौकरियों के विज्ञापन नहीं निकलने से बीएड, डीएलएड और पोस्ट ग्रेजुएट युवा बेरोजगार बैठे हैं। कॉलेज स्तर पर भी यही स्थिति है। कई विभागों में स्थायी प्राध्यापक नहीं हैंए जिससे पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

क्या कहते है लोग
हर बजट में शिक्षा और रोजगार की बात होती है, लेकिन हकीकत में न शिक्षक भर्ती निकलती है, न कॉलेजों में नई संभावनाएं बनती हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद युवा सिर्फ इंतजार ही करता रह जाता है। उस पर भी अब शिक्षा के पद खत्म करने की तैयारी में सरकार है।
मुकेश गुप्ता, स्थानीय निवासी
हमारे कॉलेज में कई विषयों के स्थायी प्रोफेसर नहीं हैं। लैब और लाइब्रेरी भी पुरानी हैं। अगर बजट में शिक्षा पर सही निवेश होता, तो हमें बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती। यह दुर्भाग्य है कि बजट में करोड़ों के आंकड़े इस बार भी दे दिए जाएंगे, लेकिन इसका सही उपयोग कहां होता है, समझ के परे है।
दीपचंद पटेल, युवा

Updated on:
21 Jan 2026 04:20 pm
Published on:
21 Jan 2026 04:19 pm
Also Read
View All

अगली खबर