दमोह. सागर नाका क्षेत्र स्थित अविनाश कॉलोनी निवासी रत्नेश पिता शिखरचंद जैन के सुसाइड केस मामले में साढ़े चार महीने बाद आखिरकार पुलिस को आरोपी राकेश पटेल के खिलाफ आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का मामला पंजीबद्ध कर लिया है। इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के लिए पीडि़त पक्ष को जहां महीनों तक पुलिस […]
दमोह. सागर नाका क्षेत्र स्थित अविनाश कॉलोनी निवासी रत्नेश पिता शिखरचंद जैन के सुसाइड केस मामले में साढ़े चार महीने बाद आखिरकार पुलिस को आरोपी राकेश पटेल के खिलाफ आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का मामला पंजीबद्ध कर लिया है। इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के लिए पीडि़त पक्ष को जहां महीनों तक पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के चक्कर लगाना पड़े, वही मामला न्यायालय के संज्ञान में भी लाना पड़ा, तब कहीं जाकर रिपोर्ट दर्ज की गई है।
दरअसल सागर नाका निवासी रत्नेश जैन 44 वर्ष के द्वारा 2 सितंबर 2025 को अपने घर के ऊपर वाले कमरे में तौलिया से फांसी का फंदा डाल आत्महत्या कर ली थी। जिस पर पुलिस ने मर्ग कायम करके मामला जांच में लिया था। वही खारी उठावना के बाद मृतक की दुकान खोले जाने पर एक सुसाइड नोट और लेनदेन का हिसाब मिला था। इसके बाद 10 सितंबर को सागर नाका चौकी पुलिस ने गवाहों के समक्ष जप्त कर लिया था। इस सुसाइड नोट में पिपरिया राजघाट निवासी राकेश पटेल के द्वारा लेनदेन को लेकर प्रताडि़त किए जाने का स्पष्ट उल्लेख किया गया था। साथ ही राकेश पटेल के वेयरहाउस में रखवाए गए लाखों के अनाज के बदले में अनावश्यक रूप से 28 लाख रुपए की देनदारी बताकर प्रताडि़त किए जाने का उल्लेख भी सुसाइड नोट में किया गया था।
उपरोक्त सुसाइड नोट देहात थाना पुलिस को सौंपे जाने के बावजूद आरोपी के राजनीतिक रसूख के चलते कोई कार्रवाई नहीं की जा रही थी। जिस पर मृतक के परिजनों के द्वारा उच्च न्यायालय में याचिका दायर करके न्याय की गुहार लगाई गई थी। जिस पर देहात थाना प्रभारी के द्वारा कोर्ट को गुमराह करते हुए उपरोक्त पत्र के हस्तलिपि परीक्षण के लिए ड्यूटी शाखा भोपाल 22 सितंबर को भेज दिए जाने की जानकारी दी गई थी। जिस पर कोर्ट के द्वारा हस्तलिपि रिपोर्ट आने का इंतजार करने का उल्लेख करते हुए याचिका का निराकरण कर दिया था।
मामला कोर्ट के संज्ञान में आ जाने पर जबकि देहात थाना पुलिस द्वारा बाद में 3 नवंबर को क्यूडी शाखा हस्त लिपी प्रशिक्षण को उपरोक्त पत्र तथा स्वाभाविक लिखावट के अन्य दस्तावेज भेजे गए थे। जिस पर 15 जनवरी 2026 को क्यू डी शाखा भोपाल से परीक्षण रिपोर्ट से यह साफ हो गया था कि उपरोक्त हैंडराइटिंग मृतक रत्नेश की ही है। इसके बावजूद देहात थाना पुलिस राजनीतिक दबाव के चलते सुसाइड नोट में नामजद प्रताडऩा आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज करने से बच रही थी। जिस पर मृतक के भाई अभिषेक जैन के द्वारा पुलिस के उच्च अधिकारियों को उपरोक्त हालात से अवगत कराया गया। साथ ही भोपाल से आई क्यूडी शाखा परीक्षण रिपोर्ट की जानकारी दी गई।
इसके बाद 18 जनवरी की शाम को सागर नाका पुलिस चौकी में उपरोक्त सुसाइड नोट की हस्त परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर आरोपी राकेश पटेल निवासी पिपरिया राजघाट के विरुद्ध बीएनएस की धारा 108 के तहत पंजीबद्ध किया गया है।