भैंसा घाट की पहाडिय़ों पर ही सिमट गए सैलानी, ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थलों तक नहीं पहुंच पाए
दमोह. नए साल पर हजारों पर्यटक देखने आए वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व का हाल इस बार सुन्न पड़ा। सैलानियों का कहना है कि अत्यधिक एंट्री फीस ने उन्हें ऐतिहासिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों तक पहुंचने से रोक दिया। इसके चलते बड़ी संख्या में लोग केवल भैंसा घाट की पहाडिय़ों पर ही सेल्फी लेते हुए वापस लौट गए।
स्थानीय पर्यटन प्रेमियों और सैलानियों का कहना है कि टाइगर रिजर्व में अब तक बाघ सहित अन्य वन्य जीवों को छोडऩे की सुविधा नहीं है और पर्यटकों के लिए आधारभूत सुविधाओं का विस्तार भी नहीं हुआ है। बावजूद इसके चार पहिया वाहनों के लिए 1500 रुपए जैसी अधिक एंट्री फीस निर्धारित की गई है। इससे मध्यम वर्ग और स्थानीय पर्यटक पर्यटन स्थलों तक नहीं पहुंच पाए और रिजर्व के वास्तविक आकर्षण का लाभ उठाने से वंचित रह गए।
सैलानी हरिशंकर दुबे ने कहा कि यह क्षेत्र प्राकृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद आकर्षक है, लेकिन एंट्री फीस इतनी अधिक है कि आम लोग यहां तक नहीं पहुंच पाते। भैंसा घाट की पहाडिय़ों से ही फोटो खिंचवा कर लोग लौट गए।
डिप्टी रेंजर विनोद कुमार ने स्वीकार किया कि उच्च शुल्क के कारण सैलानियों की संख्या अपेक्षित नहीं रही, लेकिन इसे वन्य जीव संरक्षण और रिजर्व प्रबंधन के तहत अनिवार्य बताया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शुल्क में संतुलन नहीं किया गया और पर्यटकों के लिए सुविधाओं का विस्तार नहीं किया गया तो आगामी पर्यटन सीजन में रिजर्व का वास्तविक आकर्षण प्रभावित होगा और आम जनता का वन्य जीवन के प्रति उत्साह कम होगा।