शहर में अधिकांश छोटे दुकानदार थे घरेलू गैस सिलेंडर के सहारे, कॉमर्शियल वाले भी लगा रहे भट्टी
दमोह. पर्याप्त गैस सिलेंडर के होते आग के छल्ले बनाकर प्रदर्शन करने वाले फास्ट फूड विक्रेता इन दिनों चूल्हे पर मंचूरियन, कोथे बनाते नजर आ रहे हैं, तो कुछ ने दुकान पर ताला डालना ही सही समझा है। सिलेंडर की कमी से सबसे ज्यादा मार छोटे रेहड़ी, चौपाटी वाले दुकानदारों पर पड़ी है, जो कि आमतौर पर घरेलू सिलेंडर ही उपयोग करते थे, जो भी उन्हें मौजूदा स्थिति में नहीं मिल पा रहा है। जबकि १८०० से २००० का सिलेंडर बिना नंबर में लेना वह पसंद नहीं कर रहे हैं। ऐसे में शहर में लगने वाली ३० से अधिक छोटी खाने-पीने, फास्ट फूड की दुकानें बंद हो गई है, जबकि कुछ ने चूल्हे, भट्टी, सिघड़ी, इंडक्शन आदि का सहारा लेकर दुकान को चालू रखा है।
पत्रिका ने शहर स्थित चौपाटी का रविवार को जायजा लिया। संडे को हर दुकान जरूर खुलती है, लेकिन यहां महज तीन दुकानें ही खुली नजर आई, जबकि यहां २६ दुकानें हैं, जिनमें से अधिकांश दुकानें बंद ही थी। कारण था सिलेंडर का नहीं मिलना। यहां एक-दो दुकानदारों ने घर के सिलेंडर भी दुकान में उपयोग कर लिए और अब वह भी दुकान बंद करने का विचार कर रहे है। जबकि एक दुकान पर चूल्हे से खाद्य सामग्री बनाते हुए संचालक देखे गए। यहां के दुकानदारों ने कहा कि कुछ समय और ऐसा चला तो दुकान बंद करने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं होगा।
शहर के कीर्ति स्तंभ, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, किल्लाई नाका, जबलपुर नाका, स्टेशन चौराहा, घंटाघर, टॉकीज के पास सहित शहर में ३०० से अधिक छोटे-छोटे हाथ ठेला, काउंटर, दुकानों पर चाय नाश्ता की दुकानें संचालित हो रही हैं। इनमें से भी अधिकांश दुकानें बंद ही नजर आई। पत्रिका ने जब पता किया तो बताया गया कि सिलेंडर नहीं होने की स्थिति में दुकान बंद करना मजबूरी है। कुछ जगहें ऐसी भी मिली, जहां चूल्हा, भट्टी भी नहीं चलाया जा सकता है।
शहर में संचालित ५० से अधिक रेस्टारेंट भी गैस सिलेंडर की कमी से ठप होने की कगार पर है। दो-तीन रेस्टारेंट तो सिलेंडर की कमी से रेग्युलर नहीं खुल रहे हैं, जबकि अधिकांश ने भट्टी और इंडक्शन पर कारोबार शिफ्ट कर लिया है। संचालकों का कहना है कि कॉमर्शियल नहीं तो घरेलू सिलेंडर की व्यवस्था होना चाहिए।
सिलेंडर की समस्या ने पूरा व्यापार ठप करके रख दिया है। हमारा पूरा काम तत्काल में सामग्री बनाकर देना है। ेऐसे में गैस का प्रमुख काम है। बीते एक सप्ताह से काम चला रहे हैं। ऐसे ही चला तो एक-दो दिन में दुकान बंद करना होगी।
सौरभ अग्रवाल, फास्ट फूड विक्रेता
हर तीन दिन में एक टंकी की जरूरत होती है। पांच दिन पहले बमुश्किल एक टंकी मिली थी। अब दुकान के बाहर चूल्हा लगाया है। जिस पर ही फास्टफूड तैयार कर रहे हैं। छोटे-मोटे का ही गैस से कर रहे हैं। गैस मिलना चाहिए।
आकाश ठाकुर, फास्ट फूड विक्रेता
कॉमर्शियल गैस सिलेंडर से हम करते थे, लेकिन एक हफ्ते से सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। आज से सिघड़ी शुरू की है। २३ रुपए किलो कोयला लेकर आए हैं। भट्टी भी आ गई हैं, कल से भट्टी भी लगाएंगे। दुकान बंद करेंगे तो काम ठप हो जाएगा।
-चक्रेश जैन, नाश्ता विक्रेता
होटल, रेस्टारेंट, रेहड़ी ठेले वालों के लिए सिलेंडर देने जैसे फिलहाल कोई आदेश नहीं है। आदेश आते ही व्यवस्था की जाएगी।
रचना प्रजापति, खाद्य आपूर्ति अधिकारी दमोह