MP Fake Doctors Case: दमोह में फर्जीवाड़े का अंदेशा, उधर जिलों को दस्तावेज सत्यापन के निर्देश, NHM में फर्जी डॉक्टर्स का मामला
MP Fake Doctors Case: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के जरिए जिलों में नियुक्त कथित फर्जी डॉक्टरों के मामले में एनएचएम-मध्यप्रदेश ने सभी जिलों के सीएमएचओ को संविदा डॉक्टरों के दस्तावेजों का सत्यापन कराने को कहा है। निर्देश हालफि लहाल संविदा पर कार्यरत डॉक्टरों तक सीमित है। दमोह पुलिस के हत्थे चढ़े भोपाल के आरोपी रेडियोग्राफर हीरा कौशल (Bhopal Radiographer Heera Kaushal) के कबूलनामे के अनुसार वह यह काम बीते 4 साल से कर रहा है। यानी जिलों में इस दौरान नियुक्त संविदा डॉक्टरों के दस्तावेजों की जांच (MP Contract Doctors Degree Verification) होनी चाहिए।
पत्रिका की पड़ताल (patrika investigation) में पता चला, जिले में 2021 से 42 संविदा डॉक्टर इस्तीफा देकर जा चुके (Why Contract Doctors Resigned in MP) हैं। इनमें से कई के फर्जी डिग्री वाले होने का अंदेशा (MP Fake Doctors Case) है। उधर, आरोपी सचिन यादव (तस्वीर में), राजपाल गौर ने पुलिस को संतोषजनक जवाब नहीं दिए। शुक्रवार को कोर्ट से 4 दिन की रिमांड मिली। हीरा भी रिमांड पर है। डिग्री बनाने वाले की तलाश में पुलिस ग्वालियर गई है।
दमोह सीएमएचओ डॉ. राजेश अठ्या ने जिले के संविदा डॉक्टरों को डिग्री और रजिस्ट्रेशन नंबर सत्यापित कराने पत्र जारी किए हैं। हालांकि यह संजीवनी क्लीनिकों में पदस्थ नहीं हैं। दमोह एएसपी सुजीत भदौरिया के अनुसार दो आरोपी डॉक्टरों की रिमांड बढ़ाई गई है।
इधर एक मामला 17 वर्षीय लड़की की मौत का भी सामने आया है। दमोह के पटेरा थाना अंतर्गत ग्राम महेवा में इस किशोरी की मौत के मामले में जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई की है। गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद जीवन-ज्योति संस्थान सील कर दिया गया है।
मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी के अनुसार किशोरी (Girl Died due to fake doctor treatment in Damoh) को 21 मई की रात अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजन ने शिकायत दर्ज कराई थी कि इलाज लीलाधर चौधरी द्वारा किया गया था। स्वास्थ्य विभाग की टीम और पुलिस ने अस्पताल का निरीक्षण किया।
जांच में पाया गया कि लीलाधर की शैक्षणिक योग्यता बीईएमएस (बैचलर ऑफ इलेक्ट्रो होम्योपैथी) थी, जो एलोपैथिक उपचार के लिए मान्य नहीं है। उनका मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में वैध पंजीयन भी नहीं मिला। अस्पताल में बायो मेडिकल वेस्ट प्रबंधन संबंधी दस्तावेज, प्रमाण-पत्र भी नहीं मिले।