दमोह

MP में फर्जी डॉक्टरों का नेटवर्क! 5 साल में 42 संविदा डॉक्टर्स का इस्तीफा, किशोरी की मौत से हड़कंप

MP Fake Doctors Case: दमोह में फर्जीवाड़े का अंदेशा, उधर जिलों को दस्तावेज सत्यापन के निर्देश, NHM में फर्जी डॉक्टर्स का मामला

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May 23, 2026
MP Fake Doctors Case (photo:patrika creative)

MP Fake Doctors Case: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के जरिए जिलों में नियुक्त कथित फर्जी डॉक्टरों के मामले में एनएचएम-मध्यप्रदेश ने सभी जिलों के सीएमएचओ को संविदा डॉक्टरों के दस्तावेजों का सत्यापन कराने को कहा है। निर्देश हालफि लहाल संविदा पर कार्यरत डॉक्टरों तक सीमित है। दमोह पुलिस के हत्थे चढ़े भोपाल के आरोपी रेडियोग्राफर हीरा कौशल (Bhopal Radiographer Heera Kaushal) के कबूलनामे के अनुसार वह यह काम बीते 4 साल से कर रहा है। यानी जिलों में इस दौरान नियुक्त संविदा डॉक्टरों के दस्तावेजों की जांच (MP Contract Doctors Degree Verification) होनी चाहिए।

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जवाब टेढ़े-मेढ़े, आखिर क्या है एनएचएम फर्जी डॉक्टर्स मामला

पत्रिका की पड़ताल (patrika investigation) में पता चला, जिले में 2021 से 42 संविदा डॉक्टर इस्तीफा देकर जा चुके (Why Contract Doctors Resigned in MP) हैं। इनमें से कई के फर्जी डिग्री वाले होने का अंदेशा (MP Fake Doctors Case) है। उधर, आरोपी सचिन यादव (तस्वीर में), राजपाल गौर ने पुलिस को संतोषजनक जवाब नहीं दिए। शुक्रवार को कोर्ट से 4 दिन की रिमांड मिली। हीरा भी रिमांड पर है। डिग्री बनाने वाले की तलाश में पुलिस ग्वालियर गई है।

दो आरोपियों की बढ़ाई रिमांड

दमोह सीएमएचओ डॉ. राजेश अठ्या ने जिले के संविदा डॉक्टरों को डिग्री और रजिस्ट्रेशन नंबर सत्यापित कराने पत्र जारी किए हैं। हालांकि यह संजीवनी क्लीनिकों में पदस्थ नहीं हैं। दमोह एएसपी सुजीत भदौरिया के अनुसार दो आरोपी डॉक्टरों की रिमांड बढ़ाई गई है।

बीईएमएस की डिग्री, कर रहा था एलोपैथिक इलाज, 17 साल की किशोरी की मौत

इधर एक मामला 17 वर्षीय लड़की की मौत का भी सामने आया है। दमोह के पटेरा थाना अंतर्गत ग्राम महेवा में इस किशोरी की मौत के मामले में जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई की है। गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद जीवन-ज्योति संस्थान सील कर दिया गया है।

पढ़ें पूरा मामला

मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी के अनुसार किशोरी (Girl Died due to fake doctor treatment in Damoh) को 21 मई की रात अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजन ने शिकायत दर्ज कराई थी कि इलाज लीलाधर चौधरी द्वारा किया गया था। स्वास्थ्य विभाग की टीम और पुलिस ने अस्पताल का निरीक्षण किया।

जब खुला किशोरी की मौत का पूरा सच

जांच में पाया गया कि लीलाधर की शैक्षणिक योग्यता बीईएमएस (बैचलर ऑफ इलेक्ट्रो होम्योपैथी) थी, जो एलोपैथिक उपचार के लिए मान्य नहीं है। उनका मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में वैध पंजीयन भी नहीं मिला। अस्पताल में बायो मेडिकल वेस्ट प्रबंधन संबंधी दस्तावेज, प्रमाण-पत्र भी नहीं मिले।

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Updated on:
23 May 2026 10:42 am
Published on:
23 May 2026 10:30 am
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