दमोह. आज गणेश चतुर्थी के साथ ही गणेशोत्सव शुरू हो रहा है। ऐसे में जिले भर में गणेश मंदिरों और घरों में पूजन पाठ शुरू हो जाएंगे। भगवान श्रीगणेश के देश भर में कई मंदिर हैं और अद्भुत प्रतिमाएं हैं, लेकिन जिले में भगवान गणेश की एक ऐसी अद्वितीय प्रतिमा के दर्शन करते हैं, जो […]
दमोह. आज गणेश चतुर्थी के साथ ही गणेशोत्सव शुरू हो रहा है। ऐसे में जिले भर में गणेश मंदिरों और घरों में पूजन पाठ शुरू हो जाएंगे। भगवान श्रीगणेश के देश भर में कई मंदिर हैं और अद्भुत प्रतिमाएं हैं, लेकिन जिले में भगवान गणेश की एक ऐसी अद्वितीय प्रतिमा के दर्शन करते हैं, जो की हजारों वर्ष प्राचीन होने के साथ-साथ महाभारत काल की बताई जाती है। भगवान गजानन की यह प्रतिमा वाकई अद्भुत है। जो कि बुंदेलखंड के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल देवश्री जागेश्वरनाथ धाम बांदकपुर में विराजमान है।
बताते हैं कि बनवार क्षेत्र में एक स्थान चित्राखेड़ा हुआ करता था जो महाभारत काल में चित्रलेखा रानी का राज्य बताया जाता था, उनके राज्य में चित्रखेड़ा स्थान पर अनेक को महाभारत कालीन देवी देवताओं की प्रतिमाएं हुआ करती थीं। धीरे-धीरे समय के चलते जहां उनका राज पाठ जमींदोज हुआ और मंदिर की प्रतिमाएं जहां तहां बिखरी पड़ी हुई थीं।
जिससे कुछ मंदिर के विशालकाय पत्थरों से बने प्रवेश द्वार स्तंभ बांदकपुर मंदिर के काल भैरव राम जानकी मंदिर में लगाए गए हैं और चित्राखेड़ा खेड़ा में एक विशाल गणपति मंदिर था। जिसकी प्रतिमा महाभारत काल की बताई जाती है, जो वर्तमान में देव श्रीजागेश्वर नाथ धाम बांदकपुर में विराजमान है। अब चित्रागढ़ में मंदिरों के अवशेष ही दिखाई देते हैं। कहा जाता है कि इस चित्रागढ़ में महाभारत काल की रानी चित्रलेखा को भगवान से अद्भुत वरदान प्राप्त था और मन की कल्पना अनुसार प्रतिमाओं का पाषाण साकार रूप में वरदान प्राप्ति थी।
मंदिर ट्रस्ट के श्रीराम कृपाल पाठक बताते हैं कि महाभारत कालीन चित्रागढ़ में विराजमान भगवान गणेश की अद्भुत प्रतिमा को बांदकपुर जागेश्वरनाथ धाम में बहुत पहले विराजमान किया गया था। जैसा कि बताते हैं यह प्रतिमा महाभारत काल की है अब चित्रागढ़ देवी देवताओं के प्रतिमाओं के अवशेष रह गए हैं और किसी कारण महाभारत काल का चित्रागढ़ राज्य उजड़ गया है। जागेश्वरनाथ धाम में विराजमान अद्भुत भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा महाभारत काल की बताई जाती है।