जिले की बहुप्रतीक्षित सीतानगर डैम पेयजल योजना अभी भी कागज़ों से बाहर निकलकर धरातल पर पूरी तरह नहीं उतर सकी है।
दमोह. गर्मी की तपती दोपहरी में जब ग्रामीण इलाकों में बूंद-बूंद पानी के लिए लोग परेशान हैं, तब जिले की बहुप्रतीक्षित सीतानगर डैम पेयजल योजना अभी भी कागज़ों से बाहर निकलकर धरातल पर पूरी तरह नहीं उतर सकी है। सैकड़ों करोड़ की लागत से तैयार यह डैम अब तक ग्रामीणों की प्यास बुझाने में विफल रहा है। योजना के तहत दमोह जिले के 250 गांवों तक पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जानी थी, लेकिन अब तक सिर्फ 100 गांवों में ही पाइपलाइन बिछाई जा सकी है, जबकि करीब 150 गांव अभी भी पाइपलाइन का इंतजार कर रहे हैं। जहां पाइपलाइन बिछाई भी गई है, वहां भी अब तक जल आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है।
काम की धीमी रफ्तार और लापरवाही से नाराज ग्रामीण
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में लगातार लापरवाही और अनियमितताएं बरती जा रही हैं, जिससे काम में बार बार देरी हो रही है। सूखा, नंदरई, लखरौनी, जैसे गांवों में जल संकट गहराता जा रहा है। पथरिया तहसील क्षेत्र के ग्रामीण रामस्वरूप पटेल, सीताबाई अहिरवार, ललिता रजक और मोहन अहिरवार ने बताया कि पानी लाने के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है, जिससे जीवन बेहद कठिन हो गया है। मवेशियों की देखभाल तक करना मुश्किल हो गया है।
तालमेल की कमी और तकनीकी अड़चनें बनी बाधा
जानकारी के अनुसार जल निगम, कार्य एजेंसी और ठेकेदारों के बीच समन्वय की कमी, प्रशिक्षित कर्मचारियों की अनुपलब्धता और निर्माण सामग्री की आपूर्ति में देरी से काम की गति प्रभावित हो रही है। जबकि विभागीय अधिकारी लगातार समय पर कार्य पूर्ण होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन जमीनी सच्चाई इससे काफी अलग है। दावों और हकीकत के बीच फंसी योजना जल निगम के अनुसार दिसंबर 2025 तक पाइपलाइन बिछाने का लक्ष्य है और 2026 की गर्मियों तक जल आपूर्ति शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि इससे पहले भी ऐसे कई दावे किए जा चुके हैं जो पूरे नहीं हो पाए। बहरहाल मामले में गौरव सराफ, महाप्रबंधक जल निगम, दमोह का कहना है कि पाइपलाइन बिछाने का कार्य जारी है। हालांकि दिसंबर 2025 से पहले पूरा नहीं होगा। 2026 में जल आपूर्ति संभावित है। एजेंसी को तेजी से काम करने के निर्देश दिए गए हैं।