भाजपा के अंतर्कलह का आगामी चुनाव में हो सकता है नुकसान, देश में मोदी या प्रदेश में रमन की लहर हो पर आगामी चुनाव में जीतना मुश्किल ही होगा।
दंतेवाड़ा. Bastar Tiger महेन्द्र कर्मा भले ही अब इस दुनिया में नहीं रहे पर उनके इलाके में आज भी उनके परिवार का वर्चस्व कायम है। देश में मोदी या प्रदेश में रमन की लहर हो पर आगामी चुनाव में भाजपा के लिए दंतेवाड़ा की सीट पर कब्जा करना मुश्किल ही होगा। बस्तर के घने जंगल में आते-आते लहरों का रुख कमजोर होना तय माना जा रहा है। इसकी दूसरी सबसे बड़ी वजह दंतेवाड़ा विधानसभा सीट पर भाजपा के बीच के अंतर्कलह को भी माना जा रहा है। अभी विधानसभा चुनाव को कुछ ही समय बाकी है पर पार्टी में कोई एक चेहरा ऐसा नहीं है जिस पर भाजपा यहां दांव खेल सके। 14 उम्मीदवार ऐसे हैं जो विधायक के पद पर अपना दाव करते दिख रहे हैं। दूसरी ओर कांग्रेस में बस्तर टाइगर स्व. महेन्द्र कर्मा की पत्नी व वर्तमान विधायक देवती कर्मा के करीब कोई दूसरा नहीं दिखता। हालांकि जोगी कांग्रेस ने जिस तरह से दंतेवाड़ा में किसान अधिकार रैली की शुरूआत की है इससे कुछ मुसीबत कांग्रेस के लिए हो सकती है पर यह अभी दूर की कौड़ी ही दिखाई देती है।
विकल्प के रूप में हम मजबूत
छग जनता कांग्रेस जिलाध्यक्ष बबलू सिद्दीकी भाजपा के अंर्तकलह व सरकार के खिलाफ जनता के रोष से खुद को मजबूत मान रहे हैं। उनका कहना है, जनता ने 14 साल का शासन भाजपा का देख लिया है। कांग्रेस से विधायक देवती कर्मा ने भी जनता के लिए कुछ नहीं किया, जिसके लिए उनको चुना गया था।
भाजपा की दमदार चौकड़ी के साथ एक दर्जन की चर्चा
पूर्व विधायक भीमा मंडावी, जिला पंचायत अध्यक्ष कमला विनय नाग, जनपद अध्यक्ष सुनीता भास्कर, जिला पंचायत सदस्य नंदलाल मुडामी जैसे नामों की पान-गुमटी, चौक-चौराहों पर विधायकी के लिए चर्चा आम बात है। इन नामों के अलावा भी जिला पंचायत उपाध्यक्ष मनीष सुराना की पत्नी, संघ से जुड़े जिला पंचायत सदस्य चैतराम अटामी, समाज के लिए संघ से जुड़कर काम कर रही बुधरी ताती व गंजेनार से मुन्ना मरकाम की दावेदारी की भी चर्चा है। शासकीय कर्मचारी भी भाजपा से टिकट की दावेदारी में पीछे नहीं हटेंगे। शिक्षक त्रिपुरारी मंडावी, बल्लू भवानी, पिंटू उइके व सचिव राजाराम के नाम की चर्चा है। सचिव राजाराम को कार सेवक के रुप में जाना जाता है। राजाराम 1992 में यहां से ईंट लेकर अयोध्या गए थे। इसलिए इस नाम की भी चर्चा जोरों पर है। भाजपा से एक नाम और अलग-थलग सा है। यह नाम गुंमरगुंडा आश्रम के बाबा का है। इतने नामों के बाद साफ जाहिर होता है कि भाजपा में जबरदस्त कलह की स्थिति बनी हुई है। इधर विधायक देवती कर्मा से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।