MLA Pradeep Agarwal भागवत कथा में संत ने विधायक को दिया मुक्कों वाला आशीर्वाद, हतप्रभ रह गए लोग, वायरल वीडियो चर्चा का विषय बना
MLA Pradeep Agarwal -एमपी के एक विधायक इलाके में चल रही कथा में पहुंचे। उन्होंने आशीर्वाद लेने कथावाचक का झुककर अभिवादन किया लेकिन यह क्या…कथावाचक ने विधायक को दनादन मुक्के मारना चालू कर दिया। उनकी लाई फूलमाला भी फेंक दी। मुक्के खाने और माला फेंकने के बाद भी विधायक, कथावाचक के समक्ष हाथ जोड़कर खड़े रहे। इस नजारे को देख लोग हतप्रभ रह गए। बाद में मालूम चला कि कथावाचक, जिन पर विशेष कृपा रखते हैं उन भक्तों को इस तरीके से ही आशीर्वाद देते हैं। यह पूरा घटनाक्रम कैमरे में कैद हो गया और अब इसका वीडियो खूब वायरल हो रहा है।
प्रदेश के दतिया जिले में सेंवढ़ा के पास बेरछा में श्रीमद् भागवत कथा चल रही है। सेंवढ़ा विधायक प्रदीप अग्रवाल MLA Pradeep Agarwal भी कथा में पहुंचे। वे कथावाचक संत सीताराम महाराज का आशीर्वाद लेने झुके तो संत ने उन्हें मुक्के मारे और उनके द्वारा लाई गई माला फेंक दी। विधायक को अपने पास से हटा भी दिया।
भागवत कथा के दौरान विधायक प्रदीप अग्रवाल के साथ कथावाचक के इस व्यवहार पर लोग हैरान रह गए।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विधायक जब संत बाबा सीताराम को माला पहनाकर उनका आशीर्वाद लेने झुके, तभी संत ने अचानक उन्हें मुक्के मारते हुए पीछे कर दिया और पहनाई गई माला भी दूर फेंक दी। कथा में मौजूद लोग यह देखकर दंग रह गए। बाद में बाबा के अनुयायियों ने बताया कि वे इसी तरह से ‘विशेष आशीर्वाद’ देते हैं।
मुक्के मारकर आशीर्वाद देने वाले भिंड जिले के संत सीताराम बाबा लोगों में चर्चा का विषय बन गए हैं। विधायक के साथ हुए घटनाक्रम का वीडियो भी वायरल हो गया है। बताया जा रहा है कि वीडियो चार दिन पुराना है, लेकिन गुरुवार सुबह से वायरल होने के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सीताराम बाबा का आशीर्वाद देने का तरीका अलग और अनोखा माना जाता है। उनके ऐसे वीडियो पहले भी सामने आते रहे हैं। उनके अनुयायियोें का कहना है कि संत सीताराम महाराज विशेष भक्तों को इसी अंदाज में आशीर्वाद देते हैं। जब वे किसी को कठोरतापूर्ण व्यवहार के साथ आशीर्वाद देते हैं तब उसे प्रभावी माना जाता है।
बताया जा रहा है कि इससे पहले भी संत सीताराम महाराज ने भागवत कथा के दौरान कुछ अलग व्यवहार किया था। वे व्यास गद्दी पर विराजमान आचार्य को गद्दी से उठा कर खुद वहां बैठ गए थे। उनके इस व्यवहार पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी जैसी स्थिति भी बन गई। मौके पर मौजूद लोग अलग-अलग चर्चाएं करते रहे।