दौसा

Dausa News: मलेशिया से आया है पार्सल, तुरंत दिल्ली आ जाओ, लालच में गंवा बैठा 5 लाख रुपए

सीबीआई का फर्जी इंस्पेक्टर सुनील कुमार के नाम से दौसा के एक युवक के पास व्हाट्सएप पर कॉल आया और अरेस्ट वारंट और सीबीआई के गोपनीय एग्रीमेंट की कॉपी भेज दी। इसके बाद युवक ठगों के चंगुल में फंस गया।

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Sep 21, 2024

दौसा। सीबीआई का फर्जी इंस्पेक्टर बनकर मलेशिया से नई दिल्ली गैर कानूनी पार्सल आने के मामले में धमकाकर एक युवक से 4.90 लाख रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। इस संबंध में पीड़ित ने साइबर पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। बाबाजी की छावनी स्थित बसंत कॉलोनी निवासी प्राइवेट आईटी कंपनी में कार्यरत रविकांत शुक्ला ने पुलिस को बताया कि मंगलवार दोपहर 12.20 बजे कॉल आया, जिसमें बताया कि आपका मलेशिया से नई दिल्ली एक गैरकानूनी पार्सल आया है और तुरंत नई दिल्ली पुलिस थाने आ जाओ।

पीड़ित ने कोई पार्सल नहीं मंगाने की बात कही तो आरोपी ने कहा कि आपकी आईडी और नंबर से आया है इसलिए आकर बयान दे दो। पीड़ित ने दूर होने की बात कही तो ऑनलाइन वीडियो रिकॉर्डिंग पर बयान दर्ज कराया। 12.46 बजे सीबीआई का फर्जी इंस्पेक्टर सुनील कुमार के नाम से व्हाट्सएप पर कॉल आया और अरेस्ट वारंट और सीबीआई के गोपनीय एग्रीमेंट की कॉपी भेज दी। पीड़ित के बैंक अकाउंट से करोड़ों रुपए का लेन-देना होना बताया तो युवक ने इनकार कर दिया। इसके बाद सभी बैंकों के बैलेंस की राशि चेक कराई। दोपहर 2.32 बजे आरोपियों ने आरबीआई की कॉपी भेजी, जिसमें खाते सील करने को कहा तथा सभी खातों में मौजूद राशि को एक अकांउट नंबर भेजकर उसमें डालने को कहा गया।

इसके बाद पीड़ित ने आईसीआईसीआई बैंक जाकर खाते में मौजूद 4 लाख 90 हजार 280 रुपए आरोपियों के बताए खाते में आरटीजीएस कर दिए। बैंक ऑफ इंडिया में दूसरे खाते की राशि ट्रांसफर करने के लिए पहुंचा तो वहां कर्मचारी ने आरबीआई को राशि डालने की बात सुनकर शक हो गया। कर्मचारी ने फोन पर आरोपी से बात की तो उसने पीड़ित से कहा कि मामला फर्जी है। इससे युवक के अन्य दो खातों में मौजूद राशि बच गई। इसके बाद पीडि़त युवक कोतवाली पुलिस थाने पहुंचा, जहां से साइबर थाने भेज दिया गया। साइबर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

फर्जी पत्र लगे असली जैसे

आरोपियों ने पीड़ित युवक को दिल्ली कोर्ट का फर्जी अरेस्ट वारंट व सीज ऑर्डर, सीबीआई एग्रीमेंट, आरबीआई का पत्र भेजा। कम्प्यूटर से तैयार इन फर्जी पत्रों पर अशोक चिह्न, आरबीआई व सीबीआई का लोगो, कोर्ट मुहर आदि का प्रयोग इस तरह किया गया है कि एकबारगी कोई भी देखकर धोखा खा जाए। वहीं आरोपियों के बातचीत के तरीके से भी पीड़ित ठगों के जाल में फंस गया।

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