फसलों की सुरक्षा के लिए करना पड़ रहा रतजगा
दौसा. किसानों के लिए वन्यजीवों से फसलों को सुरक्षित रखना मुश्किल होता जा रहा है। दिन के समय तो जैसे-तैसे किसान फसल की रखवाली कर लेते हैं, लेकिन सर्दी की रात में फसल को बचाना किसी चुनौती से कम नहीं है। क्षेत्र में हजारों बीघा में फैले बाण गंगा नदी वन क्षेत्र से शाम ढलते ही वन्यजीव खेतों का रुख कर लेते हैं।
सैकड़ों की संख्या में विचरण करते नील गाय व अन्य पशुओं से फसल को बचाने के लिए किसानों को रतजगा करना पड़ रहा है। किसान रात के समय अलाव जलाकर टॉर्च की रोशनी में वन्यजीवों को टकटकी लगाकर देखते रहते हैं। कुछ किसानों ने फसल की सुरक्षा के लिए खेत पर तारबंदी भी करवा रखी है। फिर भी वन्यजीव तारबंदी को लांघकर खेतों में पहुंच जाते हैं।
किसान प्रभुदयाल जांगिड़, मदनलाल तिवाडी, रघुवीर गुर्जर, रघुनंदन शर्मा, मोहनलाल मीणा आदि ने बताया कि वन्यजीव सबसे ज्यादा चने की फसल को चट करते हैं। यही कारण है कि किसान परेशान होकर बहुत कम चना की बुवाई करते हैं। करीब एक दशक पूर्व तक क्षेत्र में गिनती के वन्यजीव नजर आते थे, लेकिन अब स्थिति यह है कि खेतों में सैकड़ों वन्यजीव झुंड के रूप में नजर आते हैं। किसानों का कहना है कि उनके लिए सबसे बड़ी परेशानी वन्यजीव के रूप में ही सामने आने लगी है।
आवारा पशुओं से किसान परेशान
दुब्बी. कस्बे की ग्राम पंचायत दुब्बी,कैलाई, धनावड, कालाखो सहित आस - पास के क्षेत्र में इन दिनों आवारा पशुओं की वजह से किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।किसानों ने बताया कि आवारा जानवर खेतों में प्रवेश कर गेहूं,जौ,चना,सरसों की फसल को नष्ट कर देते हैं।
फसलों की सुरक्षा के कारण किसानो की नींद ***** हो रही है। किसानों ने बताया कि महंगे भाव के बीज व खाद लगाकर फसल तैयार की जाती है, लेकिन आवारा जानवरों की वजह से फसल पूरी तरह चौपट हो जाती है। पहले ही पानी की वजह से आधे से कम क्षेत्र में फसल की बुवाई करते हैं। उन्होंने आवारा जानवरों को पकड़कर के गोशाला में छुड़वाने की मांग की है।