शोभायात्रा में जोरदार उत्साह रहा। पुजारी पवन कुमार शर्मा ने बताया कि रघुनाथजी ने मखमली बसंती पोशाक पहनी। चांदी का मुकुट धारण करवाया।
राजस्थान के दौसा शहर में सोमवार को बसंत पंचमी का लक्खी मेला शुरू हुआ। पचास किलो चांदी के विशेष रथ में सवार भगवान रघुनाथजी। उनके साथ पीली पोशाक में सजी धजी माता जानकी। साथ में लक्ष्मणजी व नृसिंहजी। जगह -जगह होती फूलों की बरसात और हर तरफ लगते भगवान के जयकारे। ढूंढाड़ के सबसे बड़े बसंत पंचमी के मेले की शुरुआत के दौरान सोमवार को निकली शोभायात्रा व रथ यात्रा में ऐसा ही भक्तिमय माहौल रहा। इतिहासकार सुआलालतिवाड़ी ने बताया कि
भगवान रघुनाथजी पूरे साल रघुनाथजी मोहल्ले में अपने निज मंदिर में रहते हैं, जबकि बसंत पंचमी पर भरने वाले मेले के दौरान शोभायात्रा के साथ शहर के प्रमुख मार्ग से होते हुए बारादरी मैदान में पहुंचते हैं। सात दिन वहीं प्रजा को दर्शन देते हैं। शोभायात्रा में जोरदार उत्साह रहा। पुजारी पवन कुमार शर्मा ने बताया कि रघुनाथजी ने मखमली बसंती पोशाक पहनी। चांदी का मुकुट धारण करवाया। माता जानकी का चांदी के आभूषण, कंठी, कड़े, पायजेब, मंगलसूत्र, कुंडल से विशेष शृंगार किया गया। शोभायात्रा में सजीव झांकियां भी सजाई गई। इस दौरान एडीएम अरविंद कुमार शर्मा, नगर परिषद आयुक्त कमलेश मीणा, वृंदावन बिहारी राजमिश्र, विमल तिवाड़ी व अन्य मौजूद रहे।
कई साल बाद इस बार शोभायात्रा को लेकर भक्तों में जोरदार उत्साह रहा। श्री रघुनाथ महाराज सेवा समिति के राममनोहर चौकडायत ने बताया जगह जगह फूलों की बरसात से शोभायात्रा का स्वागत किया गया। मेला स्थल पर अनेक जिलों के व्यापारी पहुंच गए हैं। पहले दिन अच्छी चहल-पहल रही। शहरों के अलावा आस-पास के ग्रामीण भी बड़ी संख्या में खरीदारी करने आए। यह मेला हर दिन बढता जाएगा। सप्तमी तक रहेगा।
मेले के दौरान बारादरी में पंडित विनोद बिहारी राजमिश्र ने सूर्य वंश की कथा का वाचन किया। वे सात दिन तक भगवान राम से जुड़े प्रसंगों की कथा सुनाएंगे।